तीर्थंकर बालक जन्म से अनंत बल,ज्ञान अनेक गुणों के धारी होते हैं आचार्य श्री वर्धमान सागर जी

धर्म

तीर्थंकर बालक जन्म से अनंत बल,ज्ञान अनेक गुणों के धारी होते हैं
आचार्य श्री वर्धमान सागर जी
ऋषभदेव केसरियाजी श्री चौबीसी जिन बिंब पंच कल्याणक प्रतिष्ठा 11 फरवरी से पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी सानिध्य में ध्वजारोहण, मंडप उद्घाटन चित्र अनावरण दीप प्रज्वलन से प्रारंभ हुई आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने मंगल देशना में बताया कि सभी प्राणियों को भोग प्रधान जीवन छोड़कर त्याग का मार्ग, संस्कार प्रतिष्ठा कार्यक्रम को देखकर अपनाना चाहिए ।पंडाल में आज घट यात्रा से शुद्धता की गई है । अब कार्यक्रम स्थल मंडप पंडाल जिनालय है जिस प्रकार आप जिनालय में शुद्धता से प्रवेश करते हैं , इसी प्रकार इस जिनालय कार्यक्रम स्थल मंडप में भी शुद्धता का ध्यान रखें और अपने भाव और परिणामों को निर्मल रखें यह मंगल देशना पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने गर्भ कल्याणक के प्रथम दिवस गुरुकुल श्री ऋषभ देव में प्रकट की। ब्रह्मचारी गजू भैय्या राजेश पंचोलिया,योगेश गंगावत अनुसार आचार्य श्री ने प्रवचन में आगे बताया कि यह पंचकल्याणक का पंडाल विवाह का , शादी का मंडप नहीं है मंडप की शुद्धि मंत्रोचार से की गई है। आचार्य श्री ने बताया कि पंचकल्याणक में आप अधिक से अधिक धार्मिक कार्यक्रमों को देखकर जीवन में परिवर्तन ला सके इसके लिए यहीं पर आपकी सब तरह की व्यवस्था और सुविधा का ध्यान कमेटी ने रखा है ।आचार्य श्री ने आगे बताया कि पंचकल्याणक में आमोद प्रमोद के कार्यक्रम नहीं होते हैं ,यहां से आपको अपने बच्चों को संस्कारित करने की प्रेरणा मिलती है पर उसके पूर्व स्वयं को भी संस्कारित होना जरूरी है पंचकल्याणक में भगवान के गर्भ, जन्म ,तप,केवल ज्ञान और मोक्ष कल्याणक के संस्कार होंगे ।भगवान के संस्कार देखकर स्वयं भी संस्कारित हो जीवन में भाव परिणाम में विशुद्ध लाकर परमात्मा बनने का प्रयास करें ।भगवान के गुणों को जीवन में आत्मसात करें भगवान के दर्शन अर्चना पूजा भक्ति सम्यक दर्शन से करें तभी आपको पुण्य की प्राप्ति होगी। तीर्थंकर भी देश राज्य के राजा युवराज होते हैं संसार को असार जान कर संयम दीक्षा धारण कर सारे संसार को अपनी दिव्य देशना से सुख प्राप्त करने का मार्ग दिखाते हैं।पंचकल्याणक की क्रिया जो देवता के रूप में आप करते हैं। तीर्थंकर भगवान का जन्म अंतिम जन्म होता है क्योंकि इसके बाद वह दोबारा गर्भ में नहीं आते हैं और संसार के जन्म मरण के बंधन आवागमन से छूट जाते हैंतीर्थंकर जन्म से अनंत शक्ति के धारी होते हैं ।बालक प्रभु 1008 बड़े-बड़े कलश धड़ों से अभिषेक होता है अविचल रहते हैं।पाषाण और धातु की प्रतिमा को पंच कल्याणक में मंत्रोचार से प्रतिष्ठित कर आराध्य बनाया जाएगा ।हमें भी भगवान और गणधर स्वामी के द्वारा बताए गए मार्ग से यह अवसर मिले कि हम भी आप अरिहंत भगवान की भांति पापों कर्मों का प्रक्षालन कर सके जिस प्रकार भगवान ने कर्मों का नाश कर सिद्धालय में केवल ज्ञान प्राप्त कर विराजित हुए हैं भगवान के गुण की पूजा भजन और स्तुति की जाती है। आपको यह भावना करना चाहिए कि जैसे आपके कल्याणक हुए हैं वैसा मेरा भी कल्याण हो जाए। इसके लिए आपको अपनी शक्ति और सामर्थ को प्रकट कर पुरुषार्थ कर रत्न त्रय धर्म प्राप्त कर मानव जीवन को सफल बनाने का प्रयास करना चाहिए जिस समय साधु संतों के प्रवचन और धार्मिक क्रिया होती है उसको देखना चाहिए देखने से परिणाम में विशुद्धता आती है
पंच कल्याणक कमेटी अध्यक्ष ने स्वागत भाषण दिया।सभी अतिथियों का शाल श्रीफल माला पगड़ी प्रतीक चिन्ह से स्वागत किया। मंडप का उद्घाटन दिलीप वीना दलावत ने किया।

पंच कल्याणक प्रतिष्ठा समिति अध्यक्ष सेठ राजमल
गुरुकुल ट्रस्ट के महामंत्री सुंदर लाल ,उपाध्यक्ष सुरेश कोठारी प्रतिष्ठा समिति के महामंत्री प्रकाश भाणावत दिगंबर जैन समाज के अध्यक्ष भूपेंद्र वालावत ,प्रदीप गनोंदिया महामंत्री अनुसार वात्सल्य वारिघि आचार्य श्री वर्धमान सागर जी सानिध्य में प्रतिष्ठाचार्य सुधीर शास्त्री के निर्देशन में 11 फरवरी से 15 फरवरी तक नूतन चौबीसी प्रतिमाओ का पंच कल्याणक होगा। आगुंतक अतिथियों के लिए समुचित व्यवस्था की गई हैं। इसके पूर्व प्रातः श्री जिन मंदिर में नांदी विधान की पूजन सोधर्म इंद्र सहित सभी इंद्र परिवार द्वारा की गई। इसके बाद एक वेशभूषा में महिलाओं का अनुशासित दल सिर पर शताधिक मंगल कलश लेकर चल रहा था। विशाल जलूस मार्ग पर सभी धर्मो के नागरिकों ने स्वागत द्वार लगाए। जगह जगह पुष्प वृष्टि की जा रही थी कलश यात्रा के पीछे पंच कल्याणक में पात्र माता पिता,सोधर्म इंद्र,चक्रवती राजा,कुबेर, ईशान, सानत, माहेंद, ब्रह्म, ब्रहोत्तर, लांतव ,शुक्र, महाशुक्र, शतार आदि हाथी तथा बग्गी में सवार होकर चल रहे थे। जुलूस में अश्व , गज, बैंड , शामिल रहे।जुलूस का समापन वर्धमान सभागार में हुआ । राजमल कोठरी द्वारा मंत्रोचार के बाद धवजारोहण किया गया। कुंभ कलश स्थापना नवनीत उषा परिवार द्वारा किया गया।मुख्य कार्यक्रम स्थल वर्धमान सभागार में आचार्य श्री संघ सहित विराजित हुए। प्रथमाचार्या चारित्र चक्रवती आचार्य श्री शांति सागर जी के चित्र का अनावरण अतिथियों तथा कमेटी ने एवम् दीप प्रवज्जलन चांदमल श्रीमती द्वारा किया गया।महिला मंडल द्वारा मनमोहक नृत्य के माध्यम से मंगलाचरण प्रस्तुत किया। सुंदर भजन का गायन किया दोपहर को इंद्र सकलीकरण, इंद्र प्रतिष्ठा, मंडप प्रतिष्ठा, अंकुरारोपण, तथा जिनाभिषेषक किया गया। सभी इंद्र परिवार द्वारा याग मंडल की पूजन की गई। शाम को आरती तथा शास्त्र सभा हुई। रात्रि को गर्भ कल्याणक के नाटकीय उत्सव किया गया गर्भ में अवतरित होने पर 14 करोड़ रत्नों की प्रतिदिन वृष्टिगर्भ कल्याणक के अंतर्गत जो तीर्थंकर माता के गर्भ में आने वाले होते हैं उनके गर्भ में आने के 6 माह पूर्व से ही जन्म नगरीमें दिन में 4 बार 3:30 करोड़ कुल 14 करोड़ प्रतिदिन रत्नों की वर्षा देवों द्वारा की जाती है। तीर्थंकर माता 16 सपने देखते हैं इन 16 सपने में एरावत हाथी, महा वृषभ सिंह, अभिषेक होती लक्ष्मी, दो मालाएं, चंद्रमा सूर्य, युगल मछली, सुगंधित जल भरे हुए कलश, जल से भरा सरोवर, लहरों वाला महासागर, सिंहासन, देव विमान, नागेंद्र भवन रत्न रश्मि, तथा निर्भूम अग्नि इस प्रकार सोलह सपने तीर्थंकर की माता को सपने में दिखाई देते हैं । और जब अपने राजा पति से इसका अर्थ समझती है तब वह बताते हैं कि आप के गर्भ में तीर्थंकर भगवान का जन्म होना है जो 8 कर्मों का नाश कर मोक्ष लक्ष्मी को प्राप्त कर सिद्धालय पर विराजित होंगे।12 फरवरी को तीर्थंकर बालक का जन्म और शोभा यात्रा तथा 1008 कलशो से अभिषेक किया जावेंगा।राजेश पंचोलिया इंदौर से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी

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