जीवन को सुखी बनाना है तो दिमाग को ठंडा रखें मुनि श्री निर्दोष सागर महाराज
सागर
आचार्य श्री 108 विद्यासागर महाराज के परम शिष्य मुनि श्री निर्दोष सागर महाराज ने गौराबाई दिगंबर जैन मंदिर में धर्म सभा को संबोधित करते हुए दिमाग को ठंडा रखने की सीख देते हुए कहा कि जीवन को यदि सुखी बनाना है तो दिमाग को ठंडा रखें, जुबान को नरम रखें, आंखों में शर्म हो, दिल में रहम हो। गुरु की शरण हो और जेब गर्म हो तो आपका जीवन सुखी हो सकता है।
वर्तमान स्थिति पर कड़ा प्रहार करते हुए महाराज श्री ने कहा कि वर्तमान की परिपेक्ष में देखने में आ रहा है कि वर्तमान की स्थिति विपरीत नजर आ रही है आज मोबाइल की मेमोरी बढ़ रही है और दिमाग की मेमोरी कम हो रही है।

महाराज श्री ने एक उदाहरण देते हुए कहा कि लोग तब सजग होते हैं जब चिड़िया उड़ जाती है। यदि आपका दिमाग ठीक होगा तो रिश्ते नहीं टूटते हैं। तनाव को कम करने के लिए इंजीनियरों की आवश्यकता है इसके लिए भी इंजीनियर बनना चाहिए। स्थिति यह है की सलाह एक से मांगे हजार देते हैं। और सहयोग हजारो से मांगे लेकिन सहयोग एक देता है। उन्होंने कहा कि भारत में दुआएं बहुत सस्ती हैं, भिखारी को ₹1 दे तो वह आपकी सुखी होने की कामना करेगा।
उन्होंने कहा कि आस्था का दीप कभी बुझता नही हमेशा प्रज्वलित होता रहता है। हालत यह हो गई कि आज लोग नाश्ते का डब्बा नहीं रखते बल्कि दवाइयां का डिब्बा रखते हैं।
आचार्य श्री के उत्तम स्वास्थ्य के लिए हमें जाप देना चाहिए
मुनि श्री ने गुरुदेव विद्यासागर महाराज अस्वस्थता के विषय में कहा कि हम सभी को जाप देना चाहिए ताकि गुरुदेव जल्द स्वस्थ हो जाए। गुरुदेव अंधकार के वह चिराग है जिन्होंने हम सभी को तारते हुए सभी सभी के कल्याण का आशीर्वाद दिया है।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
