ऐसे व्यापार नहीं करें जिसमें हिंसा ज्यादा हो, जोड़ने में नहीं छोड़ने में आनंद बनाओ मुनिश्री विमल सागर महाराज सानिध्य में पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव की पत्रिका का हुआ विमोचन

धर्म

ऐसे व्यापार नहीं करें जिसमें हिंसा ज्यादा हो, जोड़ने में नहीं छोड़ने में आनंद बनाओ मुनिश्री विमल सागर महाराज सानिध्य में पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव की पत्रिका का हुआ विमोचन
निंबाहेड़ा
शनिवार की अनुपम बेला में आचार्य श्री विद्यासागर महाराज के परम शिष्य मुनि श्री विमल सागर महाराज संघ की गौरवमई उपस्थिति में पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव की पत्रिका का विमोचन किया गया।

 

 

समाज के प्रवक्ता मनोज सोनी से मिली जानकारी अनुसार नवीन जिनालय परिसर में शनिवार की मंगल बेला में आयोजित धर्म सभा में प.पू. आचार्य श्री विद्यासागर जी महामुनिराज के आज्ञानुवर्ती शिष्य प.पू. मुनिश्री विमलसागर जी , प.पू. मुनिश्री अनंतसागर जी , प.पू. मुनिश्री धर्मसागर जी एवं प.पू. मुनिश्री भावसागर जी के सानिध्य में मांगलिक प्रवचन के साथ अन्य आयोजन किए गए।

सोनी ने बताया कि धर्म सभा के शुभारंभ में सर्वप्रथम आचार्य श्री विद्यासागर महाराज के चित्र अनावरण के साथ समस्त मुनि संघ को शास्त्र भेंट किए गए जिसका लाभ धर्मावलंबियो को मिला।

इस अवसर पर पंचकल्याणक महोत्सव पत्रिका का विमोचन किया गया। इस अवसर पर मुनि श्री विमल सागर जी महाराज ने पंचकल्याणक महोत्सव का लाभ लेने के लिए सभी को प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि 84 लाख योनियों के परिभ्रमण से बचे, आयु घटती जा रही है धन बढ़ता जा रहा है, कंजूसपना निंदनीय है, दयनीय है,

उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि ऐसे व्यापार नहीं करें जिसमें हिंसा ज्यादा हो, जोड़ने में नहीं छोड़ने में आनंद मनाओ, समय को अन्य कार्यों से घटाकर नए मंदिर में पूजा भक्ति आराधना में लगाना है।इस अवसर पर मुनि श्री भावसागर जी महाराज ने कहा कि जो प्रतिमा विराजमान करता है उसके पुण्य का वर्णन करने के लिए कोई समर्थ नहीं है, अपने गुरु आचार्य श्री विद्यासागर महाराज को स्मृति में लाते हुए उन्होंने सभी को प्रेरित किया कि परम पूज्य आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज हमेशा स्वस्थ रहे उनकें लिए उनके नाम शांति धारा में प्रतिदिन नाम ले, जाप करें , दान की महत्ता को बताते हुए उन्होंने कहा किऔषधि दान करने से बीमारी कम होती है, गरीबों को भोजन ,वस्त्र दान करेंशास्त्र दान करने से बुद्धि में वृद्धि होती है, गायों की रक्षा करने से अभयदान होता है, आहार दान करने से पुण्य में वृद्धि होती है, इसी के साथ उन्होंने प्रेरणा दी की मंदिर में सभी का धन लगना चाहिए, इससे सभी की भावनाएं जुड़ती है, दान देने से आज तक कोई गरीब नही हुआ बल्कि प्रभु के करीब हुआ है, जब भी जिस व्यक्ति ने दान की भावना बनाई तो उसके धन में वृद्धि होती चली गई।

संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी

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