शिष्य की गुरु चरणों की अभिलाषा में 19 दिन में 508 किलोमीटर पद बिहार की थकान शिष्य पर नहीं दिखी मुनि श्री योग सागर महाराज ने 19 दिन में 508 किलोमीटर का बिहार कर गुरु चरणों के दर्शन किए
डोंगरगढ़
चंद्रगिरी तीर्थ पर विश्व वंदनीय आचार्य गुरुवर विद्यासागर महाराज विराजमान है। आचार्य गुरुवर विद्यासागर महाराज ऐसे महा संत हैं जिन्होंने कलयुग में सतयुग जैसी शिष्य मंडली तैयार की है।
एक शिष्य का गुरु के प्रति अनुराग क्या होता है आज जीवंत परिलक्षित हुआ जब निर्यापक श्रमण मुनि 108 योग सागर महाराज संघ सहित गुरु चरणों में चंद्रगिरी तीर्थ डोंगरगढ़ पहुंचे।

इन्होंने संघ सहित कड़कड़ाती सर्द ऋतु में ना सर्दी देखी ना पैरों के छाले बस बढ़ते चले गए। एक लक्ष्य लिए एक पथ लिए। महज 19 दिनों में 500 किलोमीटर का विहार किया जो अपने आप में यह दिखाता है की शिष्य का गुरु के प्रति क्या अनुराग है। उन्होंने 408 दिनों के बाद आज गुरु के दर्शन किए।

जब यह बिहार कर रहे थे और गुरु चरणों की समीप पहुंच रहे थे तो लग ही नहीं रहा था कि यह थके हुए से हैं क्योंकि मन में तो गुरु चरणों की प्यास जो लगी थी। महाराज श्री का संघ जैसे ही क्षेत्र की सीमा में पहुंचा।

पूज्य मुनि श्री 108 प्रसाद सागर महाराज, पूज्य मुनि श्री 108 चंद्रप्रभ सागर महाराज, पूज्य मुनि श्री 108 निरामय सागर महाराज संघ सहित अगवानी हेतु खड़े रहे। पूज्य मुनि श्री प्रसाद सागर जी महाराज संघ सहित बारंबार मुनि श्री को नमन करते दिखाई दिए। प्रतिभा मंडल की बहने जय जयकार कर रही थी। मौजूद बच्चे जय जय कार कर रहे थे। उन्होंने जिनालय के दर्शन किए और गुरु चरणों के समीप जाकर बैठे। जो दृश्य दिख रहा था।
वह ऐसा था गुरु तेरे चरणों में सर को झुका लिया है, 
जमी पर खड़ा आसमान को पा लिया है। सचमुच शिष्य की गुरु भक्ति का जीता जागता उदाहरण इससे अधिक क्या होगा। अपने आप में एक कीर्तिमान कहा जाएगा की 19 दिनों में जब भारी शीतलहर थी, आकाश ओढन और धरती बिछोना मान कर दिगंबर संत बस गुरु चरणों की आस की प्यास लिए संघ सहित बढ़ते चले गए। और वह दिन आ गया जब वे गुरु चरणों में आ गए पूज्य मुनि श्री योग सागर महाराज के मन में यही भाव उमड़ रहे होंगे।
प्यास बुझी न सागर से
बुझी ज्ञान की गागर से
जीवन की नदियों ने जीवन, पाया विद्यासागर से।
अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
