पुष्पगिरी तीर्थ पर 84 फीट लंबी गुफा में प्रकृति की अलौकिक छटा और अलौकिक वातावरण में होंगे प्रज्ञेश्वर आदिनाथ प्रभु के दर्शन पंचकल्याणक संस्कार की प्रतिष्ठा है। पुष्पदंत सागर महाराज

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पुष्पगिरी तीर्थ पर 84 फीट लंबी गुफा में प्रकृति की अलौकिक छटा और अलौकिक वातावरण में होंगे प्रज्ञेश्वर आदिनाथ प्रभु के दर्शन पंचकल्याणक संस्कार की प्रतिष्ठा है। पुष्पदंत सागर महाराज
पुष्पगिरी
भोपाल स्टेट हाईवे पर सोनकच्छ में एक अलौकिक तीर्थ जो आचार्य श्री पुष्पदंत सागर महाराज की प्रेरणा से निर्मित है। जो प्रकृति की सुरम्य छटा लिए हुए हैं।

 

 

इसी पावन पुष्पगिरी तीर्थ पर आदिनाथ जिनालय का निर्माण किया गया है। जो आचार्य श्री पुष्पदंत सागर महाराज के परम शिष्य तपोभूमि प्रणेता आचार्य श्री 108 प्रज्ञा सागर महाराज की प्रेरणा से निर्मित हुआ है जिसे प्रज्ञेश्वर आदिनाथ का नाम दिया गया है।

जिसका विधिवत पंचकल्याणक महोत्सव आचार्य श्री 108 पुष्पदंत सागर महाराज एवं आचार्य श्री 108 प्रज्ञा सागर महाराज के संघ सानिध्य में मंगलवार की बेला में संपन्न हो गया।

 

कैसा है यह प्रज्ञेश्वर आदिनाथ जिनालय
यह जिनालय अपने आप में अलौकिक है और अपने आप में एक रोमांचित कर देने वाला है इसमें 84 फीट की एक लंबी गुफा बनाई गई है। जिसके अंदर प्रवेश करने के बाद प्रथम तीर्थंकर प्रभु आदिनाथ भगवान के अलौकिक दर्शन होंगे। जो आदिनाथ भगवान की प्रतिमा विराजित की गई है वह लगभग 1500 वर्ष प्राचीन है। जो बीच गुफा के अंदर प्रवेश करता है एक अलौकिक वातावरण की अनुभूति होती है।

जब अंदर भगवान के जिनालय के दर्शन होते हैं तो उसके समीप 24 तीर्थंकर भगवान की प्रतिमाएं भी विराजित है। इसी के साथ कैलाश पर्वत पर भगवान आदिनाथ की छोटी 72 प्रतिमाएं विराजित हैं। मंदिर के सामने दोनों और भगवान शांतिनाथ और भगवान महावीर स्वामी की प्रतिमा विराजमान है। इसके साथ ही मुख्य द्वार के दोनो और झरनों का निर्माण किया गया है। जो आकर्षित करने के साथ मन में एक शीतलता प्रदान कर रहे हैं।

मंगलवार की बेला में इस पंचकल्याणक का विधिवत रूप से समापन हो गया इस अवसर पर आचार्य श्री प्रज्ञा सागर महाराज के गुरु आचार्य श्री पुष्पदंत सागर महाराज जी ने कहा कि मैं अपने आप में आनंदित हूं कि मेरे शिष्य प्रज्ञा सागर ने मुझे इस पंचकल्याणक महोत्सव में सहभागी बनाया है।आचार्य श्री ने समापन बेला के अवसर पर पंचकल्याणक का महत्व बताते हुए कहा कि पंचकल्याणक प्रतिष्ठा संस्कार की प्रतिष्ठा है। अपनी देह का पिंजरा छोड़ो निर्वाण हो जाएगा। 

इस अवसर पर आचार्य श्री के परम श्री प्रज्ञा सागर महाराज ने गुरु के प्रति कृतज्ञता प्रकट करते हुए विनम्र भाव से कहा कि मेरी क्या औकात है मैं आपको अवसर दूं, प्रभु अवसर तो आपने मुझे दिया है। अपनी चरण रज माथे पर लगाने का, अपने सम्मुख बिठाने का, गुरु भक्ति और गुरु सेवा करने का।

विश्व शांति महायज्ञ हवन पूर्णाहुति के साथ विधिवत मंत्रोचारण के साथ आचार्य श्री पुष्पदंत सागर महाराज सानिध्य में प्रतिमाओं को विराजमान किया गया इसके बाद स्नेह भोज का आयोजन किया गया।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी

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