त्याग तपस्या नियम साधना जितने भारत के योगी करते हैं उतनी कहीं और नहीं करते हैं मुनि श्री भाव सागर महाराज

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त्याग तपस्या नियम साधना जितने भारत के योगी करते हैं उतनी कहीं और नहीं करते हैं मुनि श्री भाव सागर महाराज
बांसवाड़ा
पूज्य मुनि श्री 108 भाव सागर महाराज ने मंत्र को बहुत बड़ी शक्ति बताते हुए कहा कि यदि माला के द्वारा जब करते हुए सावधानी रखी जाए तो जब करना सफल हो जाता है।

विशेष व्याख्या करते हुए महाराज श्री ने मंत्र को पेनड्राइव जैसे बताते हुए कहा कि यह मंत्र सूर्य पर एक बिंदु पर केंद्रित शक्ति को बढ़ाकर अग्नि प्रज्वलित कर देती है। उसी तरह मंत्र मन को एकाग्र करके ज्ञान रूपी ऊर्जा को प्रज्वलित कर देते हैं।

 

 

 

 

उन्होंने कहा कि इसके साथ मंत्र आध्यात्मिक ऊर्जा को भी बढ़ा देते हैं मोबाइल का उदाहरण देते हुए कहा कि दुनिया के किसी भी हिस्से में मोबाइल के द्वारा किसी से भी संबंध स्थापित किया जा सकता है वह शब्दों के आदान-प्रदान के द्वारा संबंधों को स्थापित किया सकता है, उसी प्रकार परमात्मा से संबंध स्थापित करने के लिए मंत्र एक माध्यम होते हैं। मंत्र एक प्रकार की विधा है जो बहुत कठिन गुरु गंभीर महत्वपूर्ण विशाल और गरिमा पूर्ण होता है। आंतरिक शक्तियों को विकसित करने के लिए मंत्र का उपयोग अनादि काल से अभी तक होता आ रहा है और भविष्य में भी ऐसा होता रहेगा।

 

महाराज श्री ने भारत के विषय में कहा कि भारत के योगियों के द्वारा विशेष रूप से मंत्रों की आराधना साधना और रिद्धि की रचना की है। इसका विशेष कारण है कि त्याग तपस्या नियम संयम योग साधना जितने भारत के योगी करते हैं उतनी कहीं और नहीं की जाती है इसी कारण मंत्र की सिद्धि बहुत ही सहजता से हो जाती है।

संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी

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