आज की युवा पीढ़ी पर परिवर्तन का क्लेश लगाना ठीक नहीं। प्रमाण सागर महाराज
ललगुटवा
आचार्य श्री 108 विद्यासागर महाराज के परम शिष्य पूज्य मुनि श्री 108 प्रमाण सागर महाराज सम्मेद शिखर तीर्थ से बिहार करते हुए अपने कदम गुरु चरणों की ओर छत्तीसगढ़ डोंगरगढ़ की ओर बढ़ा रहे हैं।
उनका मंगल आगमन सोमवार की बेला में रांची में हुआ पूज्य महाराज श्री के आगमन से रांची नगर में काफी हर्ष की लहर देखी गई।


महाराज श्री ने रांची से आगे बिहार करते हुए ललगुटवा में अपनी वाणी में महाराज श्री ने कहा कि आज की युवा पीढ़ी पर परिवर्तन का क्लेश लगाना ठीक नहीं है। उन्होंने सीख दी की जन्म से ही उनके संस्कारों को जगा कर रखें। जीवन में बुराइयों पर विजय पाना ही जीवन की सबसे बड़ी सफलता है। बुराइयों से अप्रभावित होकर अपने जीवन के संस्कारों को जगाना है।

उन्होंने कहा कि आज की युवा पीढ़ी के किसी कार्य में त्रुटि हो जाए तो उसे प्रोत्साहित करें, हतोत्साहित न करें। उनकी गलती बताने की बजाय उनकी अच्छाइयो को दर्शाए। युवाओं को अपने अंदर मोटिवेशन लाने के लिए अपने मार्गदर्शक द्वारा दिए गए सुझाव को सुनना चाहिए। और उस पर अमल करना चाहिए। जिससे तरक्की की ओर अग्रसर रहें।
उन्होंने कहा कि आप बाहर जाते है, और घर पर आपके यहां अतिथि भी आ जाए तो अतिथि सत्कार के साथ धार्मिक आयोजनों को शामिल कर अपना समय सुधारे। उन्होंने कहा त्याग सभी धर्म में है, परंतु जैन धर्म में इसका अलग महत्व है। क्योंकि जितना त्याग जैन शास्त्रों में है, वह शायद अन्य में है।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
