गलत कार्यों से पैसा कामाओगे तो नींद नही आएगी अजीत सागर महाराज
सागर
आत्मा के अनंत गुण हैं, उनमें श्रेष्ठ गुण ज्ञान है। दर्शन से तो केवल हम देखदेख सकते हैं। लेकिन बताने और समझने वाला ज्ञान होता है। सभी प्रकार के सुख के लिए ज्ञान की आवश्यकता होती है। आज ज्ञान और धन में अंतर है। सारी दुनिया धन कोपहले उठाएगी ज्ञान (पुस्तक) कोनहीं। रुपए से हम आमोद-प्रमोद केसाधन तो खरीद सकते हैं लेकिन वे खुशी नहीं दे सकते। ज्ञान आपकोखुशी, शांति, आनंद दे सकता है, जो
पैसों से नहीं खरीदा जा सकता। पैसोंसे दिमाग नहीं खरीद सकते। यह उद्गार मुनिश्री निर्लोभ सागर महाराजने व्यक्त किए। वे रविवार कोभाग्योदय तीर्थ परिसर में धर्मसभा को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि रत्नों से ज्यादापुस्तकों की कीमत है। इनसे ज्ञान प्राप्तहोता है। रत्नों से बाहरी चमक दिखाई देती है, लेकिन ज्ञान से आंतरिक चमकदिखाई देती है। रोटी जीवन देती है और
पुस्तक जीवन जीने की कला सिखातीहै। सौ काम छोड़कर ज्ञानियों,महात्माओं, साधुओं की संगति करो। दान देने का उपदेश उनको है जिनके पास पैसा है। दान देने के लिए यदि
पैसा कमाते हैं तो वह नहाने के पहलेशरीर में कीचड़ लगाने जैसा है।
गलत कार्यों से पैसे कमाओगे तो कभी नींद नहीं आएगी। मुनिश्री अजितसागर महाराज
धर्म सभा को संबोधित करते हुए अजितसागर महाराज ने कहा कि श्रावक लोभी होता है,और साधु निर्लोभी होता है श्रावक को लोभ कम करना चाहिए और साधुता जिनके पास होती है, वह घर का पालन-पोषण करता है। धर्म के संरक्षण के लिए दान देता है।कर्ज लेकर कभी दान-पुण्य नहीं करना चाहिए। पहले व्यक्ति एक रुपए के चार हिस्से करते थे। एक हिस्सा जीवन शैली चलाने के लिए दूसरा संतान, तीसरा माता-पिता और चौथा दान -पुण्य के लिए। आपने पैसे का सदुपयोग नहीं किया तो पतन का रास्ता खुलता है। यदि सदुपयोग किया तो सुख की ओर ले जाता है।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
