यह भारत भूमि स्वर्ग से भी महान है आचार्य कनकनंदी

धर्म

यह भारत भूमि स्वर्ग से भी महान है आचार्य कनकनंदी
सागवाड़ा
अभिनव श्रुत केवली वैज्ञानिक धर्माचार्य कनकनदी गुरुदेव ने अंतरराष्ट्रीय वेबीनार में योगेंद्र गिरी सागवाड़ा से बताया कि यह भारत भूमि स्वर्ग से भी महान है भारत में जन्म लेने के लिए स्वर्ग के देवता भी तरसते हैं। क्योंकि इस भूमि पर जन्म लेने वाले स्वर्ग मोक्ष जा सकते हैं यह स्वर्ग से भी महान हैं।

 

 

महाराज श्री ने कहा भारतवासी स्व गौरव को नहीं समझने के कारण अन्य देशों के गुलाम रहे। प्रकृति का नियम है कि उत्थान के बाद पतन, पतन के बाद उत्थान अवसर्पीणी काल के बाद उत्सर्पिणी, दिन के बाद रात, रात के बाद दिन होता है वैसे ही जब धर्म में ह्रास होता है तब महापुरुष जन्म लेते हैं। राम हिंदू धर्म जैन धर्म बौद्ध धर्म तीनों धर्म में पूजनीय है। राम केवल योग्य श्रेष्ठ राजा ही नहीं बल्कि आदर्श प्रबंधक न्याय प्रिय राजा मातृभक्त पितृ भक्त आदर्श साधु आदर्श अरिहंत सिद्ध बने हैं। जैन धर्म में राम का दूसरा नाम पदम भी है। नव बलदेव में राम बलदेव थे

जैन धर्म अनुसार राम की ऊंचाई 16 धनुष प्रमाण थी उनकी आयु 17000 वर्ष थी अध्यापक रामायण में वर्णन आया है कि राम स्वयं कहते हैं मैं प्रकाश रूप हूं निरामय निर्मल अजन्मा अद्वितीय विशुद्ध विज्ञान घन आनंद स्वरूप मैं हूं जिस आनंद स्वरूप में साधु भी रमते हैं वह राम है उनके नाम का यह रहस्य है। भारतीय हर नाम रहस्य पूर्ण है भारत में सभी रीति रिवाज सब महापुरुषों को केंद्र करके है। ऐसे विशिष्ट पुरुष राम है जिनके चिंतन मात्र से तत्काल ही महान पुण्य प्राप्त होता है। राम इतने शक्तिशाली थे कि रावण की सैना को एकक्षण में परास्त कर सकते थे परंतु उन्होंने कोई भी अमर्यादित कार्य नहीं किया। लक्ष्मण के साथ मिलकर अनेक राज्यों को अपने अधीन भी कर सकते थे परंतु ऐसा कोई भी अमर्यादित कार्य नहीं किया इसलिए उनको मर्यादा पुरुषोत्तम कहते हैं। अहिल्या का अर्थ जिसकी अवहेलना करें प्रताड़ित करें जो पतित है दीन हीन है वह अहिल्या है ऐसी नारी जाति का उद्बार राम महावीर बुद्ध के द्वारा हुआ राम दयालु करुणावंत अन्याय का प्रतिकार करने वाले सत्य निष्ठ उदार पुरुष थे अतः उनके द्वारा युद्ध में अनेक जीवों का घात होते हुए भी वह महापुरुष बने। अयोध्या का अर्थ कोई भी योद्धा उस पर विजय प्राप्त नहीं कर सकता अतः अयोध्या नाम सार्थक है इसका निर्माण आदिनाथ भगवान से पूर्व स्वर्ग के देवों ने आकर किया था अयोध्या नगरी भारत की सबसे बड़ी नहीं परंतु संपूर्ण विश्व की सबसे बड़ी नगरी समृद्ध नगरी आध्यात्मिक नगरी थी जिसका दूसरा नाम साकेत नगरी भी था प्राचीन काल में इसका विस्तार नवयोजन 72 मिल लंबाई 12 योजन 4 मिल चौड़ाई थी इसकी कुल परिधि 38 योजन थी अयोध्या का निर्माण 16 दिन में 14 कारीगरो ने किया था, सगर चक्रवर्ती के समय इसका वर्णन कौशल देश में सरयू नदी के किनारे प्रचुर धन-धान्य से संपन्न अयोध्या नगरी स्वर्ग में भी प्रख्यात थी।
विजयलक्ष्मी गोदावत से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी

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