संबंधों के ताले को क्रोध के हथोड़े से नहीं, प्रेम की चाबी से खोलें – गणिनी आर्यिका विज्ञाश्री माताजी

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संबंधों के ताले को क्रोध के हथोड़े से नहीं, प्रेम की चाबी से खोलें – गणिनी आर्यिका विज्ञाश्री माताजी

गुंसी

गणिनी आर्यिका105 विज्ञाश्री माताजी ने प्रवचन के माध्यम से जनसमूह को प्रेरित करते हुए कहा कि – अच्छे व्यक्ति को समझने के लिए अच्छा ह्रदय चाहिये न कि अच्छा दिमाग क्योंकि दिमाग हमेशा तर्क करेगा और ह्रदय हमेशा प्रेम भाव देखेगा।

 

 

 

प्रेमभाव ऐसा बंधन है ना कोई डोर दिखती है ना कोई धागा दिखता है। वो जाने कौन सा बंधन है जिसने रिश्तों को बांधा है। संबंधों के ताले को क्रोध के हथोड़े से नहीं, प्रेम की चाबी से खोले क्यों कि चाबी से खुला ताला बार-बार काम आता है और हथौड़े से खुला ताला केवल एक बार काम आता है।

श्री दिगम्बर जैन सहस्रकूट विज्ञातीर्थ, गुन्सी (राज.) की पावन धरा पर नवनिर्मित श्री 1008 शांतिनाथ चैत्यालय में व्रतियों द्वारा प्रतिदिन अभिषेक -पूजन का क्रम बना हुआ है । पूज्य माताजी के मुखारविंद से शान्तिधारा सम्पन्न हुई ।


तदुपरांत माताजी की आहारचर्या कराने का सौभाग्य संजू ललवाडी, विमल पहाडी, शिमला मोटूका एवं पारस चैनपुरा वाले निवाई वालों ने प्राप्त कर अक्षय पुण्य का संचय किया।

संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी

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