बडजात्या परिवार मूल रूप से कामां के निवासी हैं,गौरवशाली इतिहास को समेटे, धर्म ध्वजा को आगे लेकर बढ़ रहे हैं
कामा
कहा जाता है कि बडजात्या परिवार का निकास नोनेरा गांव से है किंतु ऐसा कहीं भी प्रतीत नहीं होता है क्योंकि लगभग 200 वर्ष से बड़जात्या परिवार मूल रूप से कामां में निवास कर रहा है। इसके पुख्ता सबूत कामां के श्री 1008 शांतिनाथ दिगंबर जैन दिवान मंदिर के प्रांगण में एवं बड़जात्या परिवार की वंशावली से मिलते हैं। बड़जात्या परिवार गौरवशाली इतिहास को समेटे, धर्म ध्वजा को आगे लेकर बढ़ रहे हैं।
परम् पूज्या प्रथम गणिनी आर्यिका विजयामती माताजी ने बड़जात्या परिवार को गौरवान्वित होने का मौका प्रदान किया तो सम्पूर्ण भारतवर्ष में माताजी ने परिवार के साथ कामां का नाम चरम पर पहुँचाया।

बड़जात्या परिवार के श्री संजय बड़जात्या बताते हैं कि ज्यादा पुरानी बात नही करू तो वर्ष 1995 तक कामां में जब भी साधु आर्यिका माताजी का आगमन होता था तो सब यही कहते थे कि सरावगी परिवार में चौका लग जायेगा मुझे याद भी है हमारी अम्मा कपूरी देवी व कमला बाई दोनों के द्वारा ही बैठक में ही चौका लगा दिया जाता था।

जब शांतिनाथ भगवान की मूल वेदी के समक्ष श्योकरण दास(दादाजी) के द्वारा पूजन की जाती थी तो ऐसा खो जाते थे कि देखने वाले को लगता था कि स्वयं भगवान से वार्ता कर रहे हैं। 14 जनवरी वर्ष 1993 में अतिशय हुआ और दिवान मन्दिर के तलघर से देवाधिदेव 1008 आदिनाथ भगवान प्रकट हुए जो कामां में जैनत्व के गौरवशाली इतिहास के परिचायक हैं।
बड़जात्या परिवार की पुश्तैनी जमीन भी थी लेकिन वह तत्कालीन समय में ही खुर्द बुर्द हो गई। कारण ढूंढने की आवश्यकता नहीं है।




यह गौरवशाली इतिहास लिपिबद्ध होना जरूरी है और यूं कहें कि वर्तमान में बड़जात्या परिवार की सातवीं पीढ़ी कामां में निवास कर रही है तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी।

आज भी इतनी एकता,समन्वय,स्नेह,वात्सल्य परस्पर सहयोग के साथ इतना बड़ा परिवार एक दूसरे से मिलजुल कर चल रहा है और उसका जीवंत उदाहरण कामां में आयोजित हो रहा पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव है जहां सभी मिलकर एक दूसरे का साथ दे रहे हैं और सभी पीढ़ियां इसमें सहयोग प्रदान कर रही हैं यह इतिहास वर्षों तक याद किया जाता रहेगा।
संजय जैन बड़जात्या से प्राप्त जानकारी
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
