यथार्थ ज्ञान से करें बुरी आदतों को छूमंतर :- आर्यिका विज्ञाश्री माताजी
गुन्सी
श्री दिगम्बर जैन सहस्रकूट विज्ञातीर्थ क्षेत्र,गुन्सी (राज.) में उपदेश देते हुए आर्यिका विज्ञाश्री माताजी ने कहा कि – व्यवहार सामान्य जीवन यापन का साधन है। परन्तु मानव जब गहराई से चिंतन करता है तो भ्रम व यथार्थ में अंतर स्पष्ट होने लगता है। बुरी आदतों ने मानव को जकड़ लिया है या मानव मोह वशात बुरी आदतों को जकड़े है ।
यही भेद जिस दिन मानव को यथार्थ में समझ में आ जायेगा,उसी दिन बुरी आदतें छूमंतर हो जाएगी । सहस्रकूट विज्ञातीर्थ क्षेत्र पर विराजित गणिनी आर्यिका विज्ञाश्री माताजी ससंघ सान्निध्य में शांतिधारा करने का सौभाग्य गणेशलाल बोहरा ने प्राप्त किया ।




गुरुभक्त संजय पांड्या कोटा सपरिवार ने गुरुमाँ का वात्सल्य पूर्ण आशीष प्राप्त किया। इतनी भीषण सर्दी में भी पूज्य माताजी अनशन तप को धारण करके अपनी साधना को निरंतर उत्कृष्टता प्रदान करने में रत है ।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
