टोंक जिला प्रमुख सरोज बंसल ने सहस्रकूट विज्ञातीर्थ में प्राप्त किया गुरु मां का आशीर्वाद
गुंसी
भारत गौरव श्रमणी गणिनी आर्यिका विज्ञाश्री माताजी ने प्रवचन सभा में उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधन देते हुए कहा कि – जो द्वैत और अद्वैत की भावना से ऊपर है, जो अपने आत्म-साक्षात्कार से प्रबुद्ध है; जो अज्ञान के अंधेरे से जाग्रत है ; और जो सर्वज्ञ है वह परम गुरु है! गुरु भक्ति से जीवन में निखार आता है!
प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में गुरु का महत्व है-गुरु द्वारा व्यक्ति द्विज रूप प्राप्त करता है.. जो ज्ञान के द्वारा अपने को नया बनाये और अपने अंदर रूपांतरण लाए, वही उसका दूसरा जन्म होता है और ये गुरु कृपा से ही संभव होता है ।




एक गुरु आराध्य, आदरणीय, पूजनीय होता है, और उत्तम सम्मान का पात्र होता है। वह कोई साधारण व्यक्ति नहीं है। वह आपकी सफलता की कुंजी रखने वाले कई गुणों वाले एक विशेष व्यक्ति हैं, वह आपके गुरु हैं । गुरु भक्ति, गुरु का शिष्य बनने के लिए सबसे पहली कसौटी है कि झुकना सीखो! भरने के लिए झुकना ज़रूरी है। जो विनम्र होगा उसे ही गुरु द्वारा ज्ञान प्रकट होगा! उसे गुरु भक्ति प्राप्त हो सकता है।
श्री दिगम्बर जैन सहस्रकूट विज्ञातीर्थ , गुंसी (राज.) की पावन धरा पर निर्माणाधीन 108 फीट उत्तुंग कलशाकार सहस्रकूट जिनालय का भव्य निर्माण कार्य आरम्भ हो चुका है ।टोंक जिले की जिला प्रमुख सरोज बंसल ने क्षेत्र पर पहुंचकर गुरु माँ का मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया । अखिल भारतवर्षीय जैन समाज के लिए यह तीर्थ क्षेत्र अनमोल खजाना है । अल्प समय में ही यह विकसित होकर आप सबके पुण्यास्रव में कारण बनेगा ।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
