उपदेश को अपने कानों से अमृत समझ कर पिया जाता है सुव्रतसागर महाराज
बीना
पूज्य मुनि श्री 108 सुव्रतसागर महाराज ने अपने उपदेश में उपदेश सुनने पर जोर दिया
विशेष प्रकाश डालते हुए महाराज श्री ने कहा कि उपदेश को अपने कानों से अमृत समझ कर पिया जाता है। इस बात को समझने के लिए हमें श्रद्धालु बनना पड़ेगा। और भगवान के उपदेश अमृत को पीना अर्थात सुनना पड़ेगा।

इसका भावार्थ बताते हुए महाराज श्री ने कहा कि जिस प्रकार अमृत को पीने के लिए आतुर रहते हैं इस प्रकार उपदेशों को सुनने के लिए आतुरता नहीं आई तो कल्याण भी नहीं होगा।


महाराज श्री ने आगे बोलते हुए कहा कि जिन्होंने भी अपने जीवन का कल्याण किया है अथवा जिन्होंने अपने जीवन के शिखर को पाया है उन सब ने उपदेश अमृत को पिया है। बिना उपदेश के सुने हुए आज तक किसी का कल्याण नहीं हुआ है। अरे नही भविष्य में कभी होगा। इसीलिए उपदेशों को सुनने की आदत डालनी चाहिए। फिर आपकी मन में प्रश्न आएगा कि भगवान के मंदिर जाने सी और संतों की वाणी सुनने से हमें क्या मिलता है तो सुनिए भगवान की वाणी सुनने से हमें साक्षात कुछ नहीं मिलता। किंतु उनके उपदेश को सुनकर वह अपने जीवन में सुधार लाता है और उस सुधार से हमें जीवन में सफलता प्राप्त होती है। भगवान की वाणी सुनकर परोक्ष रूप में हमें सब कुछ प्राप्त होता है।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
