देश के पहले रजत मंदिर बंधाजी अतिशय क्षेत्र पर 3000 पूर्णमासी कलश स्थापित किए गए
बंधाजी
संपूर्ण भारतवर्ष का बन रहा देश का पहला रजत मंदिर बंधाजी जहां 1008 प्रतिमाएं सहस्त्रकूट जिनालय में विराजमान होगी ऐसे पावन अतिशय क्षेत्र पर गुरुवार की बेला में मूलनायक अजीतनाथ भगवान का अभिषेक शांति धारा उत्साह के साथ संपन्न हुई।
यहां का माहौल गुरुवार को ऐसा था कि सुबह से ही भक्तों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया लगभग 15,000 से अधिक लोग इस चित्र पर पहुंचे एवं आयोजन के क्रम में 3000 से भी अधिक संख्या में पूर्णमासी कलश स्थापित किए गए।
पंचऋषिराज के गौरवमई सानिध्य में यह कलश स्थापना का क्रम शुरू हुआ विधि विधान के साथ यह मंगल कलश स्थापित किए गए। इस इस पुनीत बेला में नवागत पुलिस अधीक्षक श्रीमान रोहित काशवाणी ने क्षेत्र पर पहुंचकर तमाम व्यवस्थाओं का जायजा लिया। एवं आवश्यक दिशा निर्देश सभी को दिए।
इन गौरवमई पलों में पृथ्वीपुर के वरिष्ठ कांग्रेसी नेता नितेंद्र सिंह राठौड़ ने पहुंचकर मुनि श्री विनम्र सागर महाराज का मंगल आशीष प्राप्त किया एवं इस पावन अतिशय क्षेत्र पर सर्व सिद्धि मनोकामना कलश स्थापित किया।

इस अवसर पर पूज्य मुनि श्री विनम्र सागर महाराज ने कहा की आचार्य श्री विद्यासागर महाराज के मंगल आशीर्वाद से विश्व के प्रथम रजत मंदिर का निर्माण पूर्ण होने जा रहा है जिसकी मंदिर की नीव का काम लगभग पूर्ण हो चुका है।
उन्होंने कहा कि रजत मंदिर की परिकल्पना आचार्य श्री विद्यासागर महाराज ने की थी। आज आप सभी हजारों की संख्या में बंधा मैं पूर्णमासी कलश की स्थापना करने के लिए देश विदेश से यहां आए हो। कलश का महत्व समझाते हुए कहा कि इस पूर्णमासी कलश के माध्यम से आप लोग अपने मन के भाव भगवान के समक्ष रख सकते हैं। यह कलश 1 माह तक भगवान के श्री चरणों में रहेंगे। कई प्रकार के रिद्धि सिद्धि मंत्रों के द्वारा मंत्रित होंगे। यह कलश अगली पूर्णमासी पर भक्त अपने घर पर ले जा सकेंगे। आयोजन का कुशल संचालन बाल ब्रह्मचारी अशोक भैया ने किया।
आचार्य श्री विद्यासागर महाराज के संदेश को पढ़ कर सुनाया गया
पूज्य मुनि श्री ने कहा कि कुछ लोग ऐसे भी होंगे जो प्रथम बार अजीतनाथ भगवान के दर्शन कर रहे होंगे। उन्होंने जिक्र करते हुए कहा कि यह प्रतिमा कोई सामान्य प्रतिमा नहीं है। यह चमत्कारी महा अतिशयकारी इष्ट वियोग को दूर करने वाली प्रतिमा है। जैसे ही आप भगवान के दर्शन करने के लिए आएंगे आप भगवान की प्रतिमा को एकटक निहारते रहेंगे।
मई गुरुवार की अनुपम बेला में दोपहर के 3:00 बजे अमरकंटक में विराजमान पूज्य आचार्य श्री विद्यासागर महाराज ने संदेश भेजा कि यहां बनने वाले सहस्त्रकूट जिनालय में अजीत नाथ भगवान की 1008 प्रतिमाएं विराजमान होंगी।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
