देव, जिन दर्शन ,अभिषेक ,पूजन दान ,व्रत ,नियम से मनुष्य जीवन सार्थक करें। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी

धर्म

देव, जिन दर्शन ,अभिषेक ,पूजन दान ,व्रत ,नियम से मनुष्य जीवन सार्थक करें। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी
सलूंबर
आचार्य शिरोमणी श्री वर्धमान सागर जी जैन बोर्डिंग सलूंबर में विराजित हैं आचार्य श्री शांति सागर जी आचार्य पद शताब्दी महोत्सव अंतर्गत आध्यात्मिक संस्कार शिविर का आयोजन किया गया है। स्थानीय समाज एवम शिविरार्थियों को उपदेश में बताया कि जीने के लिए भोजन जरुरी है , भोजन से ज्यादा जल जरूरी है ,जल से ज्यादा हवा जरूरी है ,और हवा से भी ज्यादा धर्म जरूरी है। धर्म दो प्रकार के होते हैं श्रावक धर्म और साधु धर्म साधु का कार्य समाज को उपदेश देना होता है ,वही श्रावक का कर्तव्य दान और पूजा होना चाहिए यह प्रवचन सलूंबर जैन बोर्डिंग में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने धर्म सभा में प्रकट किया।

 

 

 

 

आचार्य श्री ने आगे बताया कि श्रावक के भी तीन भेद हैं उत्तम श्रावक वह होता है जो पहले आहार दान देता है उसके बाद भोजन करता है, मध्यम श्रावक वह होता है जो आहार देखता है आहार देखने के बाद भोजन करता है जघन्य श्रावक वह होता है जो आहार भी नहीं देता और भोजन आहार होने के बाद करता है वह जघन्य श्रावक है किंतु ऐसे व्यक्ति जो मुनियों के आहार के पहले ही भोजन कर लेते हैं वह अघम श्रावक की श्रेणी में आते हैं इसलिए श्रावक को श्रद्धावान, विवेकवान और क्रियावन होकर कार्य करना चाहिए ।

 

 

मंदिर में पूजन स्वयं के उत्तम द्रव्यों से भावपूर्वक करना चाहिए। जिस प्रकार आप डॉक्टर पर श्रद्धा करते हैं कि वह हमारा इलाज करेगा हम स्वस्थ हो जाएंगे इस प्रकार आपको भगवान पर भी विश्वास होना चाहिए भगवान के दर्शन अभिषेक पूजन बिना स्वार्थ के करना चाहिए। खेती में जिस प्रकार एक बीज भविष्य में बड़ा वृक्ष बनाकर फल देता है उसी प्रकार श्रावक के जीवन में अच्छे कार्य, नियम ,व्रत देव दर्शन, अभिषेक ,पूजन ,स्वाध्याय तप , संयम आदि भावपूर्वक करने से उसका फल पुण्य भी बहुत अधिक मिलता है ।

 

 

ब्रह्मचारी गजू भैय्या राजेश पंचोलिया अनुसार मुनिश्री चिन्मय सागर जी ने प्रवचन में बताया कि हर मनुष्य के पास तीन तरह की फैक्ट्री होना चाहिए एक शुगर फैक्ट्री, एक आइस बर्फ फैक्ट्री ,एक लव प्यार फैक्ट्री। शुगर फैक्ट्री से आशय आपकी जवान मीठी होना चाहिए। आइस फैक्ट्री दिमाग में लगाना चाहिए कि आपका दिमाग ठंडा रहना चाहिए, और लव फैक्ट्री दिल में सभी के लिए प्यार होना चाहिए। वर्तमान रिश्तों पर बोलते हुए मुनि श्री ने बताया कि पिता पुत्र संतान के लौकिक रिश्ते में स्वार्थ होता है किंतु गाय और बछड़े को देखें गाय बछड़े को प्यार करती है तो यह उम्मीद नहीं करती कि यह बछड़ा बड़ा होकर मेरी सेवा करेगा उसमें निस्वार्थ भावना होती है ।आपको पूर्व जन्म के अच्छे कार्यों से पुण्य से मनुष्य जन्म अच्छा कुल, स्वस्थ शरीर मिला है, इसमें संयम दान पूजा तप व्रत नियम से करके पुण्य कमा कर मनुष्य जीवन को सार्थक करना चाहिए आपके भाव और परिणाम अच्छे रहेंगे तो भव सुधर कर मोक्ष की प्राप्ति होगी।

 

 

 

आज अहमदाबाद और ऋषभ देव से सैकड़ो यात्री आचार्य श्री के दर्शन हेतु पधारे। 11 से 15 फरवरी को केसरिया जी ऋषभ देव में होने वाली पंच कल्याणक प्रतिष्ठा की आमंत्रण पत्रिका का आचार्य श्री वर्धमान सागर जी एवम कमेटी के पदाधिकारियों ने विमोचन किया
दोपहर को आचार्य संघ के सानिध्य में 1008 श्री महावीर स्वामी दिगंबर मंदिर में अनेक द्रव्यों से श्री जी का पंचामृत अभिषेक हुआ। आज रात्रि में श्री जी का 1008 दीपकों से महाआरती हुई। तथा रात्रि में सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित हुए
राजेश पंचोलिया इंदौर वात्सल्य भक्त परिवार से प्राप्त जानकारी

संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी

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