दान से शत्रुता का नाश होता है मुनि श्री भावसागर महाराज

धर्म

दान से शत्रुता का नाश होता है मुनि श्री भावसागर महाराज
अरथुना
पूज्य मुनि श्री विमल सागर महाराज संघ का नगर में आगमन हुआ जहा समाज जनों ने मंगल आगवानी की

 

 

उन्हें जयकारों के बीच चंद्र प्रभु दिगंबर जैन मंदिर लाया गया। महाराज श्री के आगमन को लेकर समाज जन में काफी उत्साह दिखा। महाराज श्री संघ ने जिनालय के दर्शन किए इसके बाद धर्म सभा हुई।

 

 

 

 


धर्म सभा में पूज्य मुनि श्री भवसागर महाराज ने दान का महत्व बताते हुए कहा कि यहां पर पहचान का मंदिर बन रहा है जिसकी उम्र 2000 वर्ष होती है। और इसमें दान करने वालो को अनंत गुना पुण्य मिलता है। इस मंदिर में सभी को सहयोग देना चाहिए। जिससे इसका जल्द पंचकल्याणक संपन्न हो सके।

 

महाराज श्री ने आगे कहा कि प्रभु का हो या परोपकार का कार्य उसके लिए जो भी दान दिया जाता है, वह अर्पित किया जाता है फिर उसे धन संपत्ति का उपयोग नहीं करना चाहिए। दान देने से व्यक्ति भगवान और महान बनता है दान से शत्रुता का नाश होता है। दान बोलकर नहीं देने से बीमारियां होती हैं, परेशानी आती है। प्रतिभा मंदिर के शिखर के लिए दान देने वालों की महिमा का वर्णन करने के लिए सरस्वती भी समर्थ नहीं है, पूर्व जाने जो भी मंदिर बनवाए थे हम उनकी सुरक्षा कर रहे हैं यह महत्वपूर्ण कार्य है। दान से सम्मान मिलता है, पूरी दुनिया में प्रसिद्ध फैलती है। करोड़ों बच्चों के उपवास का फल जन्म-जन्मांतर में किया गया तप एवं करोड़ दान का फल यदि किसी को एक साथ मिल जाए तो वह नवीन मंदिर निर्माण करने वालों को मिलता है। महाराज श्री ने कहा कि संसार अंजुलीभर जल के सामान रह जाता है। प्रतिमा विराजमान करने वाले का। पाप का नाश करने के लिए धन सर्वश्रेष्ठ माध्यम है।

उन्होंने इस बात पर भी ध्यान दिलाया की अपनी आमदनी का 25, 17 वह 10% दान करना चाहिए।

संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी

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