बुंदेलखंड स्वयं एक तीर्थ है ऐसा आचार्य श्री ने कई बार कहा है दृढ़मति माताजी
सागर
आचार्य श्री विद्यासागर महाराज की परम शिष्या आर्यिका 105 दृढ़मति माताजी ने अपने उद्बोधन में आचार्य श्री विद्यासागर महाराज के विषय में बोलते हुए कहा कि आचार्य श्री विद्यासागर महाराज हमेशा बुंदेलखंड की महिमा गाते हैं। उन्होंने अपने जीवन का सबसे अधिक समय बुंदेलखंड क्षेत्र में ही व्यतीत किया है।
माताजी ने कहा बुंदेलखंड में तीर्थ क्षेत्र, सिद्ध क्षेत्र, अतिशय क्षेत्र खूब है। बुंदेलखंड स्वयं एक सर्वोत्तम तीर्थ क्षेत्र है ऐसा आचार्य श्री विद्यासागर महाराज ने कई बार अपने प्रवचनों में उल्लेख कर चुके है।




माताजी ने कहा कि रथ की फेरी के साथ उपसंहार हुआ था आज सभी पात्रों का अभिनंदन हो रहा है। दिन आते हैं,चले जाते हैं समय आता है और चला जाता है लेकिन कार्यक्रम होते हैं वह जाते नहीं है बल्कि उसकी अमिट छाप हमारे मानस पटल पर छा जाती है। आगे कहा आचार्य श्रमण मुनियों का जीवन आयतन होता है। मंदिरों और मूर्तियों की सुरक्षा का हम सबका दायित्व है। गुणीजनों का सम्मान होना चाहिए। भूलना भी नहीं चाहिए। यह भारतीय धार्मिक, नैतिक, पारिवारिक संस्कृति है। इससे गुणों का विकास होता है। गुण है तो गुणों का सम्मान भी होना चाहिए। गुण की कीमत काम नहीं होती है। बड़े जनों का सम्मान हमेशा छोटे लोगों को करते रहना चाहिए।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
