मुनि श्री ने किए केशलोंच

धर्म

मुनि श्री ने किए केशलोंच

दमोह
परम पूज्य वात्सल्य मूर्ति मुनि श्री समता सागर जी महाराज का केशलोंच आज प्रातः नन्हे जैन मंदिर दमोह में संपन्न हुआ।
प्रचार मंत्री सुनील वेजिटेरियन ने बताया कि जैन मुनि कम से कम 2 माह अथवा 4 माह के अंदर अपने सिर मूंछ एवं दाढ़ी के बालों को अपने हाथों से उखाड़ लेते हैं यह उनके मुनीत्व के तपशचरण का परिचायक है।वे केशलूच करने से जीवो को होने वाली बाधा अथवा घात होने पर प्रायश्चित स्वरूप उपवास भी करते हैं।मुनियों की यह अनिवार्य क्रिया मानी जाती है वे इसे बहुत ही सहज और निष्प्रभ रूप से संपन्न करते हैं इस दौरान उनके चेहरे पर किसी भी तरह कष्ट का भाव नहीं होता है।

आत्म कल्याण के लिए यह कठिन चर्या करना मुनि श्री
दिगंबर जैन धर्मशाला में इसके पश्चात मुनि श्री ने अपने प्रातः कालीन मंगल प्रवचनओं में कहा कि चतुर्थ काल से जैन मुनियों की चर्या इसी तरह चलती आ रही है इसमें कोई बदलाव नहीं हुआ है। मुनि अपने 28 मूल गुणों के पालन निर्बाध रूप से करते आ रहे हैं।मुनियों को आत्म कल्याण के लिए यह कठिन चर्या करना आवश्यक होता है। मुनि धर्म प्रकृति के साथ चलता है प्रकृति के विरुद्ध जाने पर समाज को समस्याओं का सामना करना पड़ता है। अति लोभ एवं दहेज की विकृति से आज समाज में कन्याओं की कमी आ गई है, किंतु कन्या तो लक्ष्मी का रुप होती है। सरकार भी आज कन्याओं का सम्मान समुचित रूप से कर रही है,लाडली लक्ष्मी योजना आदि से प्रोत्साहन प्रदान कर रही है।समाज में कन्याओं का आदर होना चाहिए,क्योंकि वही समाज को पल्लवित एवं संस्कारित करती हैं। माता ही मुनि बालक को जन्म देती है।जो कि आगे मुनि धर्म को अंगीकार कर तीर्थंकर प्रकृति का बंद कर लेता है। और सारे संसार को मुक्ति का मार्ग दिखाता है।

संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमडी

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