कड़कड़ाती ठंड घने कोहरे में मुनि ज्ञानानंद महाराज का कामां में हुआ प्रवेश
कामां
प्रत्येक मानव को अपना जीवन धार्मिक क्रियाओं के साथ-साथ बड़े ही विवेकपूर्ण संयमित एवं मानवीय विचारधाराओं के साथ व्यतीत करना चाहिए।
उक्त उदगार दिगम्बर जैनाचार्य वसुनंदी महाराज के सुयोग्य शिष्य जैन मुनि ज्ञानानंद महाराज ने कामां के विजयामती त्यागी भवन में मंगल प्रवेश उपरांत व्यक्त किये। जैन समाज से प्राप्त सूचना के अनुसार इस अवसर पर मुनि शिवानंद महाराज ने भी कहा कि मानव वही है जो मानवता को धारण करें किंतु वह मानव की श्रेणी में नहीं आता जो मानव होते हुए भी मानवता को धारण नहीं करता है और हमेशा छल,कपट,दम्भ,पद वैभव के अहम के साथ स्वयं के लिए ही जीवन यापित करता है। मानव का सीधा सा अर्थ है कि आप सबल होते हुए निर्बल को सहारा दो और अन्य पशु पक्षियों पर दया करुणा का भाव रखो प्रकृति से खिलवाड़ न करते हुए जिओ और जीने दो का भाव रखो।मुनि प्रशमानंद महाराज ने युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि वर्तमान को युवाओं की महती आवश्यकता है क्योंकि युवा ही धर्म की ध्वजा को आगे बढ़ाने का कार्य बखूबी कर सकते हैं युवा वर्तमान की शान है तो भविष्य की पहचान है।
कड़कती ठंड में हुआ पद विहार

धर्म जागृति संस्थान से मिली जानकारी अनुसार कड़कड़ाती ठंड व घने कोहरे के बीच अल सुबह राजस्थान के बॉर्डर धिलावटी से मुनि संघ का पद विहार धर्म नगरी कामां की ओर हुआ तो युवाओं ने जैन धर्म के जयकारों के साथ मुनि संघ का मंगल प्रवेश बड़े जोश के साथ कराया। इतनी अधिक ठंड में मुनियों के दिगम्बरत्व रूप को देखकर लोगो ने आश्चर्य व्यक्त किया।



विपिन जैन को दी श्रद्धांजलि

विजयामती त्यागी आश्रम में आयोजित धर्म सभा मे धर्म जागृति संस्थान कामां द्वारा गुरु भक्त विपिन जैन असोडा हाउस मेरठ के आकस्मिक निधन पर शोक व्यक्त करते हुए श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि जैन समाज को अपूरणीय क्षति हुई है।
सिंधु में बिंदु से मिलन
दोपहर बाद जम्बूस्वामी तपोस्थली बोलखेड़ा के प्रचार मंत्री संजय जैन बड़जात्या ने बताया की दोपहर बाद विजय मती त्यागी आश्रम से तपोस्थली बोलखेड़ा के लिए मंगल विहार हुआ तो वहां पूर्व में विराजमान अपने गुरुवर आचार्य वसुनंदी महाराज से मिलन हुआ तो ऐसा लगा कि सिंधु में बिंदु मिल रहा है।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
