एक सिक्के के दो पहलू हार व जीत :- गणिनी आर्यिका विज्ञाश्री माताजी*
गुंसी
आर्यिका विज्ञाश्री माताजी ने श्रद्धालुओं को सम्बोधन देते हुए कहा कि – जीत हासिल करने के लिए संघर्ष और कड़ी मेहनत करनी पड़ती है। हार व जीत तो एक सिक्के के दो पहलू हैं। इसलिए हार से निराश न होकर जीत के लिए मेहनत व लगन के साथ खेले। वहीं हार से व्यक्ति को कभी भी घबराना नहीं चाहिए व जीत का कभी घमंड न करें। यदि आज हार हुई है तो कल जीत भी अवश्य होगी।
हार-जीत के साथ जितना अधिक मान-सम्मान व लाभ जुड़ा होगा उतना ही इसमें जोड़-तोड़ शुरू हो जाती है। अब तो समाज के हर क्षेत्र को खेल ही नहीं प्रतिस्पर्धा में परिवर्तित कर दिया गया है। फलस्वरूप मनुष्य भी जीत-हार के खेमे में बंटकर रह गया है।



ऐसा नहीं कि जीत-हार का यह खेल आज का है। यह युगों से चला आ रहा है। राजाओं के बीच युद्ध होते रहते थे जो फिर जीत-हार पर जाकर ही रुकते थे। इससे गुलामी तक हो सकती थी, राजपाट चला जाता था। अधिकांश हारे हुए राजाओं की जान ले ली जाती थी। जबकि जीतने वाले राजा का मान-सम्मान ही नहीं, राज विस्तार से लेकर अहंकार तक बढ़ जाता था।
गुरु माँ विज्ञाश्री माताजी की प्रेरणा एवं आशीर्वाद से गुंसी जिला टोंक (राज.) में सहस्रकूट जिनालय का निर्माण कार्य प्रारंभ हो चुका है । यात्रियों के लिए भोजन एवं आवास की समुचित व्यवस्था है ।
उदयपुर समाज से पधारे हुए यात्रियों ने गुरु माँ के दर्शन एवं मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया । वर्ष 2024 के शुभागमन पर 108 कलशों से श्री शांतिनाथ भगवान का महामस्तकाभिषेक श्रद्धालुओं के द्वारा किया जायेगा ।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
