मान विष के समान है, इसे धारण करने से अपमान मिलता है प्रज्ञा सागर महाराज
पुष्पगिरी
तपोभूमि प्रणेता आचार्य श्री प्रज्ञा सागर महाराज ने 10 लक्षण पर्व के द्वितीय दिवस पर उत्तम मार्दव धर्म पर प्रकाश डाला
उन्होंने अहंकार को त्याग कर विनम्र बनने की सीख दी। और कहां हाथ जोड़कर जिए, हाथ बांधकर नहीं। शास्त्रों का उल्लेख करते हुए कहा कि शास्त्र में कहा गया है कि मान विष के समान है, इसे धारण करने से अपमान मिलता है।


कोमलता अर्थात मार्दव अमृत के समान है। और इसे धारण करने वाला व्यक्ति सुख ही पाता है।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
