जीवन में आगे बढ़ना चाहते हो तो प्रतिकूल परिस्थितियों में डरना नहीं चाहिए सुव्रतसागर महाराज
बीना
शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में मुनि श्री सुव्रतसागर महाराज ने धर्म सभा में कहा कि अनुकूल परिस्थितियों के मिल जाने पर किए गए कार्य में इतना फल प्राप्त नहीं होता जितना प्रतिकूल संयोग मिलने पर होता है।
हमारे जीवन में अनुकूल परिस्थितियां और प्रतिकूल दोनों प्रकार की परिस्थितियां आती रहती है। अनुकूल परिस्थितियो मिलने पर हम कार्य को बहुत शीघ्रता से कर लेते हैं, परंतु उसमें हमारी बुद्धि और कार्य करने के तरीके की परख नहीं हो पाती है। जब प्रतिकूल परिस्थितियों मिलती है तो उस समय हम अपनी शक्ति का प्रयोग करते हैं। बुद्धि का प्रयोग करते हैं। बुद्धि और शक्ति के माध्यम से हम प्रतिकूल परिस्थितियों में अपने कार्य को संपन्न करने का पुरजोर प्रयास करते हैं। और सफलता भी प्राप्त करते हैं। तब सच आनंद प्राप्त होता है और संतुष्टि मिलती है।



महाराज श्री ने प्रेरणादायक उद्बोधन में कहा कि अगर आगे बढ़ना चाहते हो तो प्रतिकूल परिस्थितियो से डरना नहीं चाहिए, बल्कि उसका सामना करते हुए आगे बढ़ना चाहिए।
99 फेर है,समझिए यदि दो परिवार आपस में निवास करते थे, एक परिवार अमीर है, दूसरा परिवार गरीब है। किंतु जो परिवार गरीब था उसमे सुख, शांति, वात्सल्य ज्यादा था। किंतु अमीर के पास यह नहीं था। इसी कारण अमीर में गरीबी को सुख शांति भंग करने के लिए उसकी आंगन में 99 रुपए की एक थैली में रखकर फैकी। गरीब परिवार ने जैसे ही सुबह वह थैली पाई तो उसके मन में एक विचार आया कि काश इसमे एक रुपया और होता कमाने के लिए, वह बाजार में गया, उसके 100 रुपए कमाए हो गए। प्रतिदिन जो कमाई करता उसमे एक रुपया कम रह जाता है। करते-करते उसका पूरा जीवन गुजर गया। न खाया, ना पिया, न पहनना , ओढ़ा कुछ नही। बस एक रुपए की पूर्ति में दिन रात भटक भटक करके अपना जीवन बर्बाद करते चला गया।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
