वर्तमान साधु परंपरा आचार्य श्री शांति सागर जी अनुपम देन आचार्य श्री वर्धमान सागर जी7 जनवरी को सलूंबर में होगा जैन समाज का महासम्मेलन

धर्म

वर्तमान साधु परंपरा आचार्य श्री शांति सागर जी अनुपम देन
आचार्य श्री वर्धमान सागर जी7 जनवरी को सलूंबर में होगा
जैन समाज का महासम्मेलन
सलूंबर राजस्थान

भारत देश में जैन धर्म काफी प्राचीन है। कई वर्षों से अनेक पर्व महोत्सव मनाये जाते हैं, इसके पूर्व भी सहस्त्र शताब्दी महोत्सव जैन समाज द्वारा मनाए गए। जिसमें अंतिम तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी का 2500 वा निर्वाण महोत्सव सन 1974 में मनाया गया था इसी प्रकार कर्नाटक की विश्व प्रसिद्ध श्री गोमटेश्वर बाहुबली भगवान का सहस्त्र शताब्दी वर्ष सन 1981 में प्रतिमा निर्माण को एक हजार होने पर एलाचार्य श्री विद्यानंदी जी प्रेरणा से मनाया गया। जैन मठ श्रवण बेलगोला के भट्टारक श्री चारुकीर्ति जी की प्रेरणा से वर्ष 2020 में प्रथमाचार्य श्री शांति सागर जी का मुनि दीक्षा शताब्दी वर्ष हमारे संघ सानिध्य में यरनाल में मनाया गया था अब पुनः समय आया है एक महामना दिव्य आत्मा का उपकार चुकाने, गुणगान करने का ,केवल जिनकी बदौलत आज दिगंबर मंदिर सुरक्षित एवम् स्वतंत्र हैं हमारी जिनवाणी सुरक्षित हैं, जैन धर्म के दिगंबर साधु दक्षिण से लेकर उत्तर भारत, पूर्व से लेकर पश्चिम तक सम्पूर्ण देश में विहार कर धर्म देशना दे रहे हैं जिन्होंने अपने संयमी जीवन को अध्यात्म की प्रयोग शाला बनाया हम गुणानुवाद कर रहे हैं प्रथमाचार्य चारित्र चक्रवती आचार्य श्री शांति सागर जी का जिनके बारे में जो कहा जावे,लिखा जावे वह भी कम है यह मंगल देशना उन्ही की अक्षुण्ण मूल बाल ब्रह्मचारी पट्ट परंपरा के पंचम पट्टाधीश वात्सल्य वारिघि आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने सलूंबर की सभी समाज की धर्म सभा में प्रगट की।

 

 

 

 

ब्रह्मचारी गजू भैय्या,राजेश पंचोलिया इंदौर , देशवृती हुकमीचंद सिंघवी के अनुसार आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने उपदेश में बताया कि कर्नाटक के येलगुल में श्री भीमगोडा सत्यवती के तीसरे पुत्र सातगौडा का जन्म सन 1872 में हुआ आपने सन 1915 में क्षुल्लक दीक्षा सन 1919 में एलक दीक्षा तथा वर्ष वर्ष 1920 में मुनि दीक्षा ली आपका विशाल संघ होने के कारण सन 1924 में आपको आचार्य पद दिया गया । चरित्र का चक्र पूरे भारत में फैलाने के कारण आपको चारित्र चक्रवर्ती की उपाधि दी गई आपने 40 वर्ष के दीक्षित संयमी जीवन में 9938 उपवास किए । अपने जीवन काल में 88 दीक्षा सहित सैकड़ो भाव आत्माओं को व्रत नियम दिए। विजातीय मंदिर प्रवेश प्रकरण में अंतिम फैसले के पूर्व लगातार 3 दिन उपवास करते हुए भगवान के समक्ष णमोकार मंत्र का सतत जाप करते रहे। आपने जीवन काल में 18 करोड़ से अधिक मंत्रो का जाप किया।

 

 

 

 

 

बड़ी प्रसन्नता की बात है कि आज समाज की विशालता है और समाज सक्षम है यह आत्मबल शक्ति सामर्थ क्षमता का श्रेय आचार्य आचार्य शांति सागर जी को है।क्योंकि हम बिना भय के निश्चित होकर जीवन व्यापन कर रहे हैं।आज प्रतिवर्ष अनेक पंच कल्याणक हो रहे है नए मंदिरों का निर्माण हो रहा है किंतु आचार्य श्री शांति सागर जी के शताब्दी आचार्य पदारोहण के प्रति समाज की उदासीनता को दूर कर आचार्य आचार्य शांति सागर जी के उपदेश को जन जन तक कारगर ठोस जन जागरण अभियान की जरूरत है इसके लिए समाज के युवाओं से वृद्ध सभी की सक्रियता युवाओं के जोश और बुजुर्गों के अनुभव की जरुरत है ।

 

 

 

 

मेवाड़ और बागड़ की समाज गुरु भक्त है हमने उदयपुर प्रवेश में आचार्य श्री शांति सागर जी का शताब्दी महोत्सव मनाने का सिंहनाद किया है । आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने भगवान श्रीचंद्र प्रभ और भगवान श्री पार्श्व नाथ के जन्म एवम् तपकल्याणक तिथि पौष कृष्ण 11 आगामी 7 जनवरी 2024 को सम्पूर्ण उदयपुर सलूंबर दिगम्बर जैन समाज को सलूंबर में बैठक में आचार्य पद शताब्दी महोत्सव कार्यक्रम मनाने की प्रेरणा दी।
आचार्य श्री के प्रवचन के पूर्व मुनि श्री हितेंद्र सागर जी ने आचार्य श्री शांति सागर जी के उपकारों को वीर रस से सराबोर कविता के माध्यम से समाज में जोश की प्रेरणा दी।अब समय आ गया कि आचार्य श्री शांति सागर जी के उपकारों का ऋण चुकाने का अवसर आया है आचार्य श्री ने कष्ट सह कर जिन धर्म की शान बढ़ाई, पथ पथ की बेड़ीयो को पग पग चल कर बेड़ी तोड़ी है देश में जिनवाणी की होली जली थी,उस मां जिनवाणी की रक्षा की। बैठक में नरेंद्र मिंडा, यशवंत नावडिया, महिपाल खेतावत, प्रियदर्शी गांधी, अमित पारडिया, विवेक कोडिया, लक्ष्मीलाल ढालावत, विवेक कुनिया आदि उपस्थित थे। संचालन दिनेश चंद्र जैन ने किया
राजेश पंचोलिया इंदौर वात्सलय भक्त परिवार से प्राप्त जानकारी

संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी

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