आचार्य श्री विद्यासागर महाराज का रायपुर में हुआ भव्य मंगल प्रवेश

धर्म

आचार्य श्री विद्यासागर महाराज का रायपुर में हुआ भव्य मंगल प्रवेश

 रायपुर

संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागरजी महाराज ससंघ का आगमन छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में दौपहर में बरोदा ग्राम से हुआ एवं विधानसभा रोड़ से होते हुये शहर के मालवीय रोड़ स्थित बड़े जैन मंदिर में हुई भव्य मंगल अगवानी।

 

 

 

प्रातःकालीन बेला मे ग्राम बरोदा में आचार्य श्री संघ की मंगल अगवानी छत्तीसगढ़ राज्य के विभिन्न नगरों से तथा रायपुर शहर के विभिन्न जिनालयों से भक्तजनों ने की तत्पश्चात अष्टमंगल द्रव्यों से पूजन कर मंगल आशीष लिया।

 

 

इस अवसर पर ग्राम बरोदा में निर्यापक मुनि श्री प्रसाद सागर जी महाराज ने धर्मसभा को संबोधित करते हुये कहा कि”तलवार की कींमत उसकी धार से होती है,इंसान कींमत उसके व्यवहार से होती है,जैसा उसका व्यवहार होता है उसकी कीमत वैसी ही बनती है आप अपना व्यवहार ऐसा रखो कि जहा पर भी आप रहो वहा के लोग आपको चांहे और प्रेम करे और आपको करे प्यार और जब आप वहा से निकल जाओ तो लोग करें आपको याद और जहा पर तुम जा रहे हो वहा के लोग करे तुम्हारा इंतजार”

 

 

 

उपरोक्त बात परमपूज्य आचार्य गुरूदेव के चरित्र और जीवन पर लागू होती है, वह जहा पर रहते है वहा के लोग उनको चाहते है,और वह जहा से निकल जाते है,उधर के लोग उनको याद करते है।

 

 

 

मुनि श्री ने कहा कि गुरु की महिमा वरणी ना जाय यह तो छत्तीसगढ़ का पुण्य है जो आचार्य महाराज को लगभग एक वर्ष हो गया है,और अभी आपके सामने चंद्रगिरि तीर्थ के पदाधिकारी आगामी समय में पंचकल्याणक का निवेदन कर रहे थे मुनि श्री ने कहा जंहा पर दवा काम नहीं करती है वहा पर दुआ काम करती है और जहा पर दवा काम नहीं करती है वहा पर आपके स्वं का आत्मचिंतन काम करता है, जब कोई व्यक्ति अल्सर से बीमार होता है,तो डाक्टर कहता है कि आप अपनी सोच को बदल लीजिये आप एकदम ठीक हो जाऐंगे इसीलिये कहा गया है कि आयुर्वेद का प्रथम सूत्र है पहला सुख निरोगी काया अर्थात अपनी मानसिकता अच्छी रखो प्रसन्न रहो क्योंकि प्रसन्नता से हर समस्या का समाधान मिल जाता है उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में जो लोग पहली पहली बार राजनीति में आऐ है उनके कंधों पर राज्य की कमान सोंप दी है।

 

 

उन्होंने कहा कि वतन की कमान का आधार संविधान  है और संविधान का आधार शिक्षा और संस्कार होते है” मुनि श्री ने कहा कि आचार्य श्री ने मुकमाटी में कहा कि “पूत के पांव पालने में दिखते है” यह पालना और कोई नहीं आपके संस्कार ही होते है जो आपको दिये जाते है उन्होंने कहा कि भारत की राजनीति में जो नये नये लोगों को युवा लोगों के कंधों पर बागडोर सोंपी जा रही है और जो मौका दिया जा रहा है उससे ही भारत को आगे ले जाया जा सकता है।

 

 

 

इस अवसर पर चंद्रगिरि तीर्थ डोंगरगढ़ जो कि छत्तीसगढ़ का प्रथम तीर्थ है वहा पर बन रहे भगवान श्री चंद्रप्रभु के विशाल जिनालय के आगामी समय में होंने वाले भव्य पंचकल्याणक की रुपरेखा कार्यकारी अध्यक्ष विनोद बड़जात्या एवं महामंत्री चंद्रकांत जैन ने रखते हुये सभी धर्मप्रेमी वंधुओ को छत्तीसगढ़ के प्रथम तीर्थ पर पधारने का अनुरोध किया।

 

 

 

दयोदय महासंघ प्रवक्ता अविनाश जैन विदिशा ने बताया आचार्य गुरूदेव को रायपुर नगर के सभी जिनालय कचना, लाभान्डी,शंकरनगर, मालवीय रोड़ टैगोर नगर पदमनाभ नगर दुर्ग आदि स्थानों से आये भक्तों ने श्री फल अर्पित कर पधारने का अनुरोध किया कार्यक्रम का संचालन राजेश जैन रज्जन ने किया।

 

संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी

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