आचार्य पुष्पदंत सागर महाराज अपने शिष्य की समाधि स्थल पर जब पहुंचे तो उनकी आंखे हुई नम
तरुणसागरम
एक ऐसा क्षण देखने को मिला जब गुरु जब शिष्य की समाधि स्थल पर पहुंचे तो उनकी उनकी आंखें भर आई। और वह भावुक हो उठे।
हम बात कर रहे आचार्य श्री 108 पुष्पदंत सागर महाराज की जिन्होंने ऐसे क्रांतिकारी संत को दीक्षा दी जिन्हें हम क्रांतिकारी संत तरुण सागर के रूप में जानते हैं। आज वह हमारे बीच नहीं है। लेकिन उनकी स्मृति सभी के अंतः स्थल में विराजमान है। उन्ही क्रांतिकारी संत तरुण सागर महाराज की समाधि स्थली तरुण सागरम पर पूज्य गुरुदेव का आगमन हुआ। उनके साथ क्षुल्लक श्री 105पर्व सागर महाराज भी आए

इस अवसर पर उन्होंने अपने शिष्य मुनि श्री तरुण सागर महाराज के विषय में कहा की वे सब को एक-एक सौगात देकर के गए हैं इसको लेकर मैं बहुत आनंदित हूं। महाराज जी जब अपना उद्बोधन दे रहे थे तब वह भी काफी भावुक थे। और मौजूद भक्त भी इन क्षणों देख भावुक थे। उन्होंने मुनि श्री तरुण सागर महाराज की संगमरमर की बनी आकर्षक प्रतिमा को एक टक निहारा




निश्चित रूप से अपने शिष्य के द्वारा किए गए अनुकरणीय कार्य के प्रति किस गुरु के रोम पुलकित नहीं होंगे। वही सार्थकता मुनि श्री तरुण सागर महाराज ने सिद्ध की।

यही कहेंगे मुनि श्री तरुण सागर महाराज के प्रति सबको जगाने वाले सोए, इनको कौन जगाए
तरुण सिंधु बिन कड़वे प्रवचन हमको कौन सुनाएं
सबको जगाने वाले सोए, इनको कोन जगाए
तरुणाई में गए तरुण यह दुख सहा ना जाए
सबको जगाने वाले सोए इनको कौन जगाए
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
