शुद्ध भावों से नवधा भक्ति करने से भगवान भी भक्त के घर आहार लेने अवश्य आ जाते हैं जैसे राजा श्रेयांस ने की थी आचार्य श्री विद्यासागर महाराज
नेवारी तिल्दा
विश्व वंदनीयआचार्य गुरुवर विद्यासागर महाराज ने शुद्ध भावों से भक्ति करने पर जोर देते हुए अपना उद्बोधन दिया।
महाराज श्री ने ज्ञान कल्याणक महोत्सव के अवसर पर आगे कहा कि सामान्य एक राजा जिनको नव दीक्षित भावी तीर्थकर महाराज जी को यह आहार दान करने का सौभाग्य मिला था, ऐसा क्यों हुआ ? कोई पक्षपात नहीं,

इसके विषय में गुरुदेव ने कहा राजा श्रेयांस के संस्कार ऐसे थे, जो पूर्व भव में इन्होंने यह आहार दिया था, वह स्वप्न में आया ऐसा सुना है, महापुराण में लिखा है। और उनके यहां गये, क्यो ? दूसरे राजा के यहां क्यों नही गये ? क्यों कि दूसरे राजा ने नवधा
भक्ति पूर्वक आहार दान का कोई दृश्य नही बनाया।और श्रेयांस राजा ने नवधा भक्ति पूर्वक पूर्व में जो घटना घटी थी, उसके याद आने से स्वप्न से ही इनका काम हो गया।

उन्होंने महत्व बताया और कहा इसलिए भक्ति में तार तमय्य होता है, तो महाराज मिलते मिलते भी नही मिलते हैं। ऐसा कहो आप महाराज हमारे घर आ जाओ तो वे नही आ सकते।
माननीय प्रधान मंत्री नरेंद्र जी मोदी केलिये गुरुजी खूब आशीर्वाद देते हैं ।

आचार्य श्री ने कहा आज तक तो हमने ऐसे नही बोला है,लेकिन आज अवसर आ गया, तो इसलिये बोल रहे

हैं… जिनके घर न बसा, अपने घर की चिंता नही करते हुये, अपने परिवार की चिंता नही करते हुये, और वो रात दिन आपकी सेवा के लिये तैयार हैं। हमारे पास भी आया करते है,हम भी उनके लिये खूब आशीर्वाद दे देते है।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
