श्री आदिनाथ गुरुकुल जिनालय में श्री आदिनाथ भगवान सहित अनेक भगवान विराजित। सीपूर पारसोला के लिए हुआ विहार
ऋषभदेव।

श्रद्धा,आस्था,विश्वास,विनय और भक्ति से मोक्ष की राह प्रशस्त होती हैं श्री आदिनाथ भगवान के मोक्ष गमन कर सिद्धालय विराजित होते ही पंचकल्याणक पूर्ण हो गया।
पंचकल्याणक पाषाण और धातु की प्रतिमा को भगवान बनाने की प्रक्रिया है ,भगवान बनाने के लिए विशेष आयोजन होता है जैसे पूर्व में सौधर्म इंद्र, कुबेर आदि साक्षात तीर्थंकर बालक का पंच
कल्याणक करते थे उसी प्रकार नाटक रूप में आप लोग इंद्र बनकर पंचकल्याणक की क्रियाएं करते हैं।पंचकल्याणक प्रतिष्ठा के बाद भगवान पूज्य हो गए हैं यह मंगल देशना श्री आदिनाथ भगवान के मोक्ष कल्याणक के अवसर पर आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने प्रकट की गजू भैय्या,राजेश पंचोलिया योगेश गंगावत अनुसार




आचार्य श्री ने बताया कि आज श्री आदिनाथ भगवान का मोक्ष कल्याणक का दृश्य आप सब ने देखा आदिनाथ कुमार का जन्म अयोध्या नगरी में हुआ था और उन्होंने मोक्ष कैलाश पर्वत से प्राप्त किया हर व्यक्ति की संसारी प्राणी की इच्छा है कि वह भी संसार से मुक्त होना चाहते हैं भगवान ऋषभदेव ने दीक्षा के पूर्व महाराजा रहते हुए जनता को ऐसी मसीह कृषि शिल्प कला और वाणिज्य का उपदेश जीवन यापन के लिए दिया साथ ही अपनी दो पुत्री ब्राह्मी और सुंदरी को अंक विद्या और लिपि विद्या का ज्ञान दिया उनके पुत्र भारत के नाम पर ही यह देश भारत है आचार्य श्री ने कहा कि
पंचकल्याणक प्रतिष्ठा के नाटक की दृश्य को देखकर आप भी जीवन में परिवर्तन लाए कई बार यह प्रश्न उत्पन्न होता है कि इतनी पंचकल्याणक प्रतिष्ठा क्यों करी जाती है आज जितने प्राचीन जिनालय हैं प्राचीन प्रतिमा है उनकी भी प्रतिष्ठा पूर्व में लोगों ने की थी तो यह धरोहर हमें आज काम आ रही है और आज जो पंचकल्याणक प्रतिष्ठायें हो रही है वह भविष्य के लिए धरोहर है रहेगी श्रद्धा, आस्था, विश्वास , विनय और भक्ति से जीवन में पाप का प्रक्षालन होता है।
शास्त्रों में उल्लेख है कि दर्शन करने से, भक्ति करने से भगवान भी बन सकते हैं ।भगवान की भक्ति अंतरंग से श्रद्धा और विनय के साथ करना चाहिए गुरुकुल मंदिर को नवीन रूप देने के बाद प्रतिष्ठा का कार्य पूर्ण हुआ नागपुर मुंबई और अहमदाबाद अनेक नगरों से आए भक्त तथा ऋषभदेव के भक्त जिनकी भगवान के प्रति आस्था , श्रद्धा , और भक्ति थी ,उनका जीवन मंगलमय होगा ।आप समाज जनों ने संग्रहित संचय किये धन को दान देकर उपयोग किया इस दान का उदारता पूर्वक उपयोग धार्मिक कार्य में किया है जिनालय में आराध्य की आराधना का पूजा अभिषेक का फल सभी को मिलता है भगवान के जिन बिंब प्रतिमा के दर्शन से सम्यक दर्शन प्राप्त होता है सम्यक दर्शन के अभाव में प्राणी संसार में परिभ्रमण कई भव से कर रहे हैं। इसलिए श्रद्धा भक्ति से जीवन में निर्वाण प्राप्त करने का पुरुषार्थ कर मनुष्य जीवन को सार्थक करने का प्रयास करे।भगवान के प्रतिदिन दर्शन अभिषेक पूजन करने से मोक्ष मार्ग की राह प्रशस्त होती है मनुष्य जीवन की सार्थकता जिनबिब के दर्शन अभिषेक पूजन स्वाध्याय से है जन्म को सार्थक कर, मरण को दीक्षा रुपी लक्ष्मी से से वरण करने का कार्य सौभाग्य शाली जीव कर जीवन को सार्थक करते हैं। जैन धर्म की महिमा बहुत है भगवान की आत्मा भी हमारी आत्मा जैसी है उन्होंने भी संसार में परिभ्रमण किया। संसार परिभ्रमण में मिथ्यात्व को नष्ट कर सम्यक दर्शन प्राप्त किया । सम्यक दर्शन से केवल ज्ञान प्राप्त कर जितनी आयु शेष थी, तब तक भगवान भी संसारी रहे। अब मोक्ष कल्याणक के दिन कर्म बंधन से मुक्त होकर भगवान की आत्मा परमात्मा हो गई है।आचार्य श्री ने आगे बताया आप आकुलता में रहते हैं इसलिए दुखी हैं । भगवान ने आकुलता से निराकुलता,अशांति से शान्ति, के लिए श्रद्धा गुण प्रगट किया । आचार्य श्री ने बताया कि मन की चंचलता से वाणी में चंचलता आती है ,और वाणी की चंचलता से , काय की चंचलता आती है । मन , वाणी, और काय की चंचलता से कर्मों का आश्रव होता है ।हम आप सभी संसारी है ।कार्यक्रम के प्रतिष्ठाचार्य पंडित हंसमुख शास्त्री दरियाबाद ने कहा कि केसरिया जी ऋषभदेव प्रतिष्ठा आचार्य पंडितों की नगरी है यहां से अनेक विद्वान हुए हैं पंचकल्याणक कार्यक्रम से जीवन में बदलाव लाना चाहिए हमें धर्म और संस्कृति की रक्षा करना चाहिए यह उधर ताराचंद जैन विधायक उदयपुर शहर ने व्यक्त कियाअसम के राज्यपाल महामहिम
गुलाबचंद कटारिया ने कहा कि संत पावर हाउस है उनके प्रवचन से निकटता से संत समागम से हमें नहीं ऊर्जा और कार्य दिशा मिलती है मेरा आचार्य श्री से काफी वर्षों से संबंध रहा है उन्होंने आचार्य श्री से वर्ष 2024 का चातुर्मास सेक्टर 11 में करने का अनुरोध का श्रीफल भेंट कियाश्रीमद जिनेन्द्र पंचकल्याणक प्रतिष्ठा प्राण महामहोत्सव का समापनःगुरुकुल धर्मार्थ ट्रस्ट एवम् पंच कल्याणक महोत्सव समिति अध्यक्ष सेठ राजमल कोठारीगुरुकुल ट्रस्ट के महामंत्री सुंदर लाल भाणावत ,उपाध्यक्ष सुरेश कोठारी प्रतिष्ठा समिति के महामंत्री प्रकाश भाणावत दिगंबर जैन समाज के अध्यक्ष भूपेंद्र वालावत ,प्रदीप गनोंदिया महामंत्री अनुसार आचार्यश्री वर्धमान सागर ससंघ सान्निध्य में हुए कार्यक्रम मंदिरों में प्रतिमा विराजमान के साथ शिखरों पर कलशरोहण ध्वजारोहण केवल ज्ञान संस्कार क्रिया संहिता सूरी पंडित हँसमुख शास्त्री प्रतिष्ठाचार्य एवम् पंडित सुधीर शास्त्री मार्तंड के कुशल निर्देशन में संपन्न हुई ।वहीं 15 फरवरी को अग्निदेव द्वारा सत्कार विधि व मोक्ष कल्याणक पूजा का आयोजन किया गया। विसर्जन कार्यक्रम के साथ ही महामहोत्सव का समापन हुआ।वात्सल्य वारिधि आचार्यश्री वर्धमान सागर महाराज ससंघ के सानिध्य में महामहोत्सव का विसर्जन श्रीमद आदिनाथ एवम् चौबीसी जिनेन्द्र पंचकल्याणक प्रतिष्ठा प्राण महामहोत्सव के अंतिम दिन को ध्यान व आशीर्वाद सभा, श्री जिनाभिषेक एवं नित्यार्चन, मोक्षकल्याणक दृश्य का आयोजन किया गया। वात्सल्य वारिधि आचार्यश्री वर्धमान सागर महाराज ससंघ के सानिध्य में अग्निदेव द्वारा संस्कार विधि, मोक्ष कल्याणक पूजा, हवन, पूर्णाहुति की गई।इसके पूर्व आचार्यश्री वर्धमान सागरचरण प्रक्षालन और आचार्य श्री को पुण्यार्जक परिवार द्वारा किया गया। वहीं श्रीजी को रथयात्रा के माध्यम से श्री आदिनाथ जिनालय गुरुकुलदिगम्बर जैन मंदिर लाया गया। संघ सानिध्य में श्री नूतन बेदीयो पर पुण्यार्जक परिवारों द्वारा श्री आदिनाथ भगवान सहित अनेक प्रतिमाएं विराजित कर सौभाग्य शाली परिवार द्वारा अभिषेक किया गया। नूतन शिखरों पर पुण्यार्जक परिवारों द्वारा कलशारोहण एवम नूतन जैन ध्वजा लगाई गईदिनांक 15.2,2024 आदिनाथ जिनालय गुरुकुल ऋषभदेव में वात्सल्य वारिधि श्री 108 श्री वर्धमान सागर जी महाराज के सानिध्य मे ध्वज दंड एव’कलश आरोहण प्रातः किया गया । दोपहर को विसर्जन के साथ महोत्सव का समापन हुआ। श्री पदाधिकारियों ने महामहोत्सव के दौरान आवास, भोजन, यातायात, जुलूस व्यवस्था, प्रशासनिक व्यवस्था, पूजन विधान व कलश वितरण, मंच व्यवस्था आदि समितियों के सराहनीय सहयोग का आभार जताया।राजेश पंचोलिया इंदौर से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 
