जिनालय बनाने वाले निश्चित ही स्वर्ग जाकर देव बनेंगे क्योंकि उन्होंने अपना समय शरीर और धन-धर्म के लिए समर्पित किया है चंद्रप्रभ सागर महाराज
नेवरा तिल्दा
आचार्य श्री विद्यासागर महाराज के शिष्य पूज्य मुनि श्री 108 चंद्रप्रभा सागर महाराज ने अपनी धर्म सभा को संबोधित करते हुए जिनालय बनाने वालों का बड़ा महत्व समझाते हुए कहा कि जब मंदिर में आते हैं तो सबसे ज्यादा परिणाम विशुद्ध होते हैं, क्योंकि उसे सारा संसार हम भूल जाते हैं। घंटी बजाते हैं, भगवान की ओर देखते हैं और णमोकार मंत्र बोलते हैं। और उसे समय हम सारा संसार भूल गए हैं।
उस समय जो पुण्य बंध किया गया वह करोड़ों रुपए देने के बाद भी नहीं मिलेगा। आचार्य पुष्पनंदी ने तत्वाचार ग्रंथ में लिखा की धनिया की पत्ती के बराबर मंदिर बनवाओ, सरसों के दाने जैसी छोटी प्रतिमा बनवाओ, यदि इतना भी कर लेते हो तो आपको देवपद प्राप्त हो सकता है।




प्रेरणादायक शब्दों में महाराज श्री ने कहा कि आप लोग तो इतना भव्य जिनालय बना रहे हैं आप लोग कहां जाएंगे? स्वर्ग ही जाएंगे यह निश्चित है। अपने धन का, शरीर का, समय का सही सदुपयोग किया है। जो व्यक्ति धर्म के लिए करता है, वह धर्मात्मा बनता है। और जो संसार के लिए कार्य करता है वह संसारी बनता है।
काजल अंकित जैन मुंबई से प्राप्त संकलन के साथ अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
