अंतर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागर जी महाराज की जा 40 दिवसीय “बसंत भद्र व्रत साधना” महापारणा सम्पन्न

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अंतर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागर जी महाराज की जा 40 दिवसीय “बसंत भद्र व्रत साधना” महापारणा सम्पन्न

कुंजवन उदगांव
तपस्वी सम्राट आचार्य श्री सन्मति सागर जी महाराज की समाधि स्थली उदगाव में अन्तर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागर जी महाराज का भव्य चातुर्मास सम्पन्न हुवा।

 

 

 

इसी कड़ी में इस बार भक्तों के मध्य अडोल , अकंप साधना करते हुए गुरुदेव , जो अनुपम , अनमोल , अद्भुत , अविस्मरणीय , अकल्पनीय तपस्या की कड़ी में एक अध्याय जोड़ते हुवे 40 दिन की मौन उपवास साधना प्रारंभ किया जिसका महापारणा मंगलवार को उदगाव में सौम्य मूर्ति उपाध्याय मुनि 108 पीयूष सागर जी मुनिराज के निर्देशन में निरन्तराय आहार सम्पन्न हुवा।

 

इस महापारणा महोत्सव पर अन्तर्मना ने अपनी 40 दिन बाद मौन साधना खोलते हुवे आचार्य श्री ने कहा किआज की पीढ़ी इक्ट्ठा करने के लिये जी रही है.. और पुरानी पीढ़ी इक्ट्ठा रहने के लिए जी रही थी..!

 

दुनिया में सबसे बड़ा भ्रम है कि पैसा बढ़ने से हमारे घर परिवार और जीवन में सुख शान्ति बढ़ जायेगी। समझ नहीं आता कि आखिर क्यों ? भारत में जन्म लेकर कोई एक रोटी के लिए तरसता है और वही एक पड़ोसी का कुत्ता बेशकिमती गाड़ी में घूमता है। जिनके पास अपार धन राशि है, इसका मतलब यह तो नहीं कि वे बहुत सुख शान्ति और आनन्द का जीवन जी रहे हो ?

 

 

 

 

 

 


पैसा किसी के पास कुछ हो सकता है,, किसी के पास कुछ ज्यादा हो सकता है,, और किसी के पास बहुत ज्यादा हो सकता है.. फिर समझ नहीं आता कि एक रोटी के लिए तरस रहा है और एक कुत्ता बड़ी बड़ी गाड़ियों में धन पतियो की पत्नियो के साथ घुम रहा है। अरे भाई! जिनके पास धन कम है, वे दुनिया के सबसे अधिक खुश, सन्तुष्ट व्यक्ति भी तो हो सकते हैं। दुनिया में 07 तरह का धन है-


पहला धन स्वस्थ शरीर – अधिक पैसा होना ही सब कुछ नहीं है,, सेहत का ठीक होना भी बेहद ज़रूरी है। कुछ लोगों के पास धन तो बहुत है पर उनके सुख भोगने का, खाने पीने का सुख नहीं है। भारत में धन गरीब लोग कम है, मन गरीब लोग ज्यादा है। धन गरीब लोग स्वस्थ प्रसन्न मिलेंगे और मन गरीब लोग दुखी, परेशान, बीमार नजर आयेंगे।

 

दूसरा धन कामयाबी – बहुत से लोग अमीर घर में पैदा होने के बाद भी सफल नहीं हो पाते और वही एक गरीब चाय बेचकर सफलताओं के शिखर को छू लेता है।

 

तीसरा धन साहस-धैर्य ज़िन्दगी के हर कदम पर कांटे बिछे हैं,, स्वयं को ही देख भाल और सम्भल कर चलना होगा अन्यथः कांटा लग जाएगा।

चौथा धन मित्रता – निस्वार्थ भाव से एक दूसरे के सुख दुःख व में सहयोगी बनना। मित्रता से रहित हो। छल कपट और चाटुकारता से रहित हो
पांचवा धन कौशल-प्रतिभा किसी भी लक्ष्य को पाने के लिये केवल प्रयास ही पर्याप्त नहीं है,, उसके लिये कार्य कौशल की क्षमता भी होना चाहिए।

छठवां धन इज्जत या प्रतिष्ठा आपके पास अपार धन राशि है,, लेकिन घर परिवार और समाज में आपकी कोई इज्जत-प्रतिष्ठा नहीं है, तो वह अपार धन बेकार है।

सातवां धन सन्तोष – जो प्राप्त है,, वह पर्याप्त है। जो प्राप्त है, उसे पसंद करो और जो पसंद है, उसे प्राप्त करो। सन्तोष का अर्थ है –प्रभु इतना दीजिए, जा में कुटुम्ब समाय.. मैं भी भूखा ना रहूं, साधू ना भूखा जाये..!

इसी के साथ गुरुदेव ने नये व्रत की घोषणा करते हुए संकल्प लिया*।गुरुदेव ने नया व्रत ग्रहण किया जिसका नाम है – ” *वज्र मध्य व्रत* ” – *यह व्रत 38 दिवसीय होगा जिसमे 29 उपवास एवं 9 पारणे होगे* !
कोडरमा मीडिया प्रभारी जैन राज कुमार अजमेरा से प्राप्त जानकारी

 

संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी

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