सेवा का फल होता है बहुत मीठा :- गणिनी आर्यिका विज्ञाश्री माताजी

धर्म

सेवा का फल होता है बहुत मीठा :- गणिनी आर्यिका विज्ञाश्री माताजी
गुन्सी

श्री दिगम्बर जैन सहस्रकूट विज्ञातीर्थ गुन्सी , जिला – टोंक (राज.) में गणिनी आर्यिका विज्ञाश्री माताजी के ससंघ सान्निध्य में प्रतिदिन अभिषेक शांतिधारा के क्रम में आज की शांतिधारा करने का सौभाग्य आशीष जैन जबलपुर , विनोद जैन शास्त्री जयपुर व प्रेमचन्द जैन दूनी वालों ने प्राप्त किया । शांति प्रभु के चरणों में शांतिविधान करने का अवसर मदनलाल जी साईवाड़ वाले विवेक विहार जयपुर ने प्राप्त किया ।

 

धर्मसभा को संबोधित करते हुए
पूज्य माताजी ने सभी को मन में सेवा भाव उजागर करने के लिए मंगल उद्बोधन देते हुए कहा कि – हमें सदा देव शास्त्र गुरू की तथा अपने से बडे – बुजुर्गों की सेवा भक्ति करना चाहिए ।

 

 

 

 

इनकी सेवा से पुण्य का बंध होता है और पाप कर्म कटता है। वर्तमान में स्थितियां इतनी विपरीत हो गई है किसी के अंदर सेवा का भाव ही नहीं बचा । जिन बच्चों को माता – पिता ने पाल – पोषकर इतना बडा कर दिया । आज उन बच्चों को उनकी सेवा करना , उन्हें अपने पास रखना बहुत बडा कष्ट लगता है। जिससे वे उन्हें वृद्धावस्था में वृद्धाश्रम में छोड़ आते हैं। माताजी ने इस प्रकार का भाव रखने वाले प्रत्येक युवाओं को ललकारते हुये कहा – जो संतान अपने माता – पिता के साथ ऐसा घृणित व्यवहार करते हैं उन्हें अपने आप पर शर्म आनी चाहिए ।


जिन्होंने तुम्हें जन्म दिया , पढ़ाया लिखाकर इतना बड़ा किया तुम्हारी खुशी के लिए अपनी इच्छाओं का परित्याग किया उनके उपकार को तुमने क्षण भर में भुला दिया। तिर्यंच भी किसी के द्वारा अपने पर किये उपकार को नहीं भूलता । फिर तुम तो मानव हो। आज जैसा व्यवहार हम करेंगे वैसा ही व्यवहार भविष्य में हमारी संतान तुम्हारे साथ करेगी। सेवा क्या है – हाथ पैर दबाने का नाम सेवा नहीं है बल्कि जिसको जहाँ जैसी आवश्यकता है उस तरह से उनकी सहायता करना मदद करने का नाम सेवा है । प्राचीन कहावत है सेवा करने से मेवा मिलता है अर्थात सेवा से बहुत फल मिलता है।

क्षेत्र कमेटी द्वारा आगामी 10 दिसम्बर 2023 को होने वाले पिच्छिका परिवर्तन एवं 108 फीट उत्तुंग कलशाकार सहस्रकूट जिनालय के भव्य शुभारम्भ में सम्मिलित होकर इस सुअवसर में साक्षी बनकर पुण्यार्जन करने हेतु निवेदन किया।

संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी

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