शताब्दी समारोह शीतकालीन प्रवास कार्यक्रम परोपकार बाहर में नहीं भावना में होता है – आचार्य वर्धमान सागर महाराज
निवाई – गुरुवार को सकल दिगम्बर जैन समाज निवाई के तत्वावधान में आयोजित प्रवचन माला में वात्सल्य वारिधि आचार्य श्री वर्धमान सागर महाराज ने धर्म सभा को संबोधित करते हुए कहा कि पर के हित की भावना का उद्भव कहीं बाहर से नहीं अंतरंग से उत्पन्न होता है। आचार्य वर्धमान सागर महाराज संत निवास नसियां जैन मंदिर पर धर्म सभा को सम्बोधित किया उन्होंने कहा कि बदले की भावना से जो उपकार किया जाता है वह उपकार नहीं व्यापार है। ऐसा व्यापार करके आप धन तो कमा लेंगे पर धर्म नहीं कमा सकते। उन्होंने कहा कि धर्म का व्यापार नहीं होता करोड़ों रुपए देकर भी आप कहीं किसी दुकान से धर्म का एक अंश भी नहीं पा सकते हैं। इस देश में जन्म लेने वाले भगवान महावीर भगवान राम आदि के वंशजों को क्या हो गया है। हिंसा का परोपकार की भावना से च्यूत होने का यह परिणाम है कि रामराज्य में जहां दूध की नदियां बहती थी वहां पानी भी पर्याप्त पीने को नहीं मिल रहा है। जो देश धन्य धान्य से परिपूर्ण हो विश्व में सोने की चिड़िया के नाम से प्रसिद्ध था वह कर्ज के बोझ से लद गया है। परोपकार बाहर में नहीं पुस्तकों में नहीं विचारों में होता है। भावना में होता है अपकार मिलने पर भी उपकार नहीं छोड़ना सच्चा परोपकार है। मुनिराजो एवं त्यागी व्रतीयो को आहार देना भी परोपकार है। इस दौरान जैन मुनि प्रज्ञान सागर महाराज ने कहा कि आपको यदि अपना भाग्य चमकाना है तों अहर्निश पुरुषार्थ करो परन्तु दूसरों को मिटाने का नहीं स्वपर के उत्थान का करो। उन्होंने कहा कि सुख कभी रहता नहीं तो दुःख का भी अन्त है इस नीति को स्मरण रखना और सम्यक पुरुषार्थ में निरत रहना निश्चित ही जिस सुख शांति की प्राप्ति के लिए आप भटक रहे हैं वह आपको प्राप्त हो जाएगी। इस दौरान समाजसेवी सन्मति चंवरिया गोपाल कठमाणा जितेन्द्र चंवरिया सुशील गिन्दोडी़ शंभु कठमाणा ने श्री फल चडा़कर आशीर्वाद लिया। जैन समाज के प्रवक्ता विमल जौंला एवं सुनील भाणजा ने बताया कि धर्म सभा का मंगलाचरण विनिता बगड़ी ने किया। शीतकालीन प्रवास के दौरान आचार्य श्री वर्धमान सागर महाराज संध का प्रतिदिन स्वाध्याय प्रतिक्रमण का निरन्तर स्वाध्याय किया जा रहा है। संत निवास पर आचार्य श्री वर्धमान सागर महाराज की संगीतमय आरती की गई। इसी प्रकार जैन मुनि प्रज्ञान सागर एवं मुनि प्रसिद्ध सागर महाराज द्वारा आनन्द यात्रा का आयोजन किया गया जिसमें श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। गुरु भक्त राजेश पंचोलिया एवं मीडिया प्रभारी विमल जौंला राकेश संधी ने बताया कि आगामी 19 जनवरी को निवाई में राष्ट्रीय स्तर पर चारित्र चक्रवर्ती आचार्य शान्तिसागर जी महाराज का शताब्दी समारोह धूमधाम से मनाया जाएगा जिसमें 18 जनवरी को आचार्य वर्धमान सागर महाराज के सानिध्य में विशाल शोभायात्रा निकाली जाएगी।
निवाई – गुरुवार को सकल दिगम्बर जैन समाज निवाई के तत्वावधान में आयोजित प्रवचन माला में वात्सल्य वारिधि आचार्य श्री वर्धमान सागर महाराज ने धर्म सभा को संबोधित करते हुए कहा कि पर के हित की भावना का उद्भव कहीं बाहर से नहीं अंतरंग से उत्पन्न होता है। आचार्य वर्धमान सागर महाराज संत निवास नसियां जैन मंदिर पर धर्म सभा को सम्बोधित किया उन्होंने कहा कि बदले की भावना से जो उपकार किया जाता है वह उपकार नहीं व्यापार है। ऐसा व्यापार करके आप धन तो कमा लेंगे पर धर्म नहीं कमा सकते। उन्होंने कहा कि धर्म का व्यापार नहीं होता करोड़ों रुपए देकर भी आप कहीं किसी दुकान से धर्म का एक अंश भी नहीं पा सकते हैं।
इस देश में जन्म लेने वाले भगवान महावीर भगवान राम आदि के वंशजों को क्या हो गया है। हिंसा का परोपकार की भावना से च्यूत होने का यह परिणाम है कि रामराज्य में जहां दूध की नदियां बहती थी वहां पानी भी पर्याप्त पीने को नहीं मिल रहा है। जो देश धन्य धान्य से परिपूर्ण हो विश्व में सोने की चिड़िया के नाम से प्रसिद्ध था वह कर्ज के बोझ से लद गया है। परोपकार बाहर में नहीं पुस्तकों में नहीं विचारों में होता है। भावना में होता है अपकार मिलने पर भी उपकार नहीं छोड़ना सच्चा परोपकार है। मुनिराजो एवं त्यागी व्रतीयो को आहार देना भी परोपकार है।
इस दौरान जैन मुनि प्रज्ञान सागर महाराज ने कहा कि आपको यदि अपना भाग्य चमकाना है तों अहर्निश पुरुषार्थ करो परन्तु दूसरों को मिटाने का नहीं स्वपर के उत्थान का करो। उन्होंने कहा कि सुख कभी रहता नहीं तो दुःख का भी अन्त है इस नीति को स्मरण रखना और सम्यक पुरुषार्थ में निरत रहना निश्चित ही जिस सुख शांति की प्राप्ति के लिए आप भटक रहे हैं वह आपको प्राप्त हो जाएगी। इस दौरान समाजसेवी सन्मति चंवरिया गोपाल कठमाणा जितेन्द्र चंवरिया सुशील गिन्दोडी़ शंभु कठमाणा ने श्री फल समर्पित कर आशीर्वाद लिया।
जैन समाज के प्रवक्ता विमल जौंला एवं सुनील भाणजा ने बताया कि धर्म सभा का मंगलाचरण विनिता बगड़ी ने किया। शीतकालीन प्रवास के दौरान आचार्य श्री वर्धमान सागर महाराज संध का प्रतिदिन स्वाध्याय प्रतिक्रमण का निरन्तर स्वाध्याय किया जा रहा है। संत निवास पर आचार्य श्री वर्धमान सागर महाराज की संगीतमय आरती की गई। इसी प्रकार जैन मुनि प्रज्ञान सागर एवं मुनि प्रसिद्ध सागर महाराज द्वारा आनन्द यात्रा का आयोजन किया गया जिसमें श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। गुरु भक्त राजेश पंचोलिया एवं मीडिया प्रभारी विमल जौंला राकेश संधी ने बताया कि आगामी 19 जनवरी को निवाई में राष्ट्रीय स्तर पर चारित्र चक्रवर्ती आचार्य शान्तिसागर जी महाराज का शताब्दी समारोह धूमधाम से मनाया जाएगा जिसमें 18 जनवरी को आचार्य वर्धमान सागर महाराज के सानिध्य में विशाल शोभायात्रा निकाली जाएगी।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312






