गांधी सागर बांध 63 वर्ष बाद भी आज मजबूती से खड़ा है। 63 वर्ष पूर्ण होने पर एक रिपोर्ट
मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले में स्थित यह बांध चंबल नदी के तट पर बसा है जिसका आज ही के दिन 19 नवंबर 1960 को देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के कर कमलो से हुआ था।
देश में कई बड़े बांध है और यह भी एक प्रमुख बांधों में से एक कहा जाता है लेकिन इसके विषय में कहा जाता है कि यह एशिया के बनने वाले बांधों में सबसे कम खर्चे में बना था। इसके साथ ही समय सीमा पर बनकर तैयार होने के कारण इसमें जो भी चीफ इंजीनियर थे उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया जा चुका है। जब यह बनकर तैयार हुआ था तो इसकी लागत 18 करोड़ 40 लाख आई थी इसकी आधारशिला देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के द्वारा 7 नवंबर 1954 को रखी गई थी।




यदि हम इस बांध पर पानी की भराव क्षमता को माने तो 1312 फीट की होती है। जहां पर बिजली भी पैदा की जाती है यह पावर स्टेशन 65 फीट लंबा और 56 फीट चौड़ा है। इस बांध की जो प्राकृतिक छटा है वह सभी के लिए देखते हुए बनती है। जब इस बांध पर जाया जाता है और नौका विहार किया जाता है तो चंबल नदी की भराव क्षमता का अंदाजा लगाया जा सकता है।
लोकार्पण का दिन 19 नवंबर ही क्यों चुना गया
क्या आप सभी को पता है इस बांध का लोकार्पण आज की तारीख का क्यों चुना गया। हम बताते है
यह दिन इसलिए चुना गया क्योकि इस दिन इंदिरा गांधी का जन्मदिन था इसको बनने मे कहा जाता है की लगभग 6 साल का वक्त लगा चम्बल नदी पर बना यह बाँध देश के प्रमुख बांधो मे से एक है इसकी आधारशिला भी नेहरु ने रखी और लोकार्पण भी उन्होने ही किया इस बाँध की कीमत जो बनने मे लगी उस पर गोर करे उस समय 18 करोड़ 40 लाख का खर्च आया था यह बाँध बिना किसी मशीनरी के बना इस बाँध की सुन्दरता वैभवता पर्यटकों को अपनी और खीचती है यह देश की अमुल्य धरोहर है।
एक रिपोर्ट अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
