श्री महावीर स्वामी के निर्वाण से प्रेरणा लेकर जीवन का निर्माण करे आचार्य शिरोमणि श्री वर्धमान सागर जी
उदयपुर
श्री महावीर स्वामी के जीव ने 30 वर्ष की उम्र में गृह त्याग कर संयम धारण कर दीक्षा ली। 12 वर्षों तक कठोर तप किया तथा केवल ज्ञान प्राप्त कर 30 वर्षों तक धर्म का प्रवर्तन किया । श्री आदिनाथ भगवान की आयु 84 लाख वर्ष पूर्व की थी किंतु श्री महावीर स्वामी की आयु मात्र 72 वर्ष की थी उन्होंने कार्तिक कृष्ण अमावस्या को निर्वाण प्राप्त किया।
मावस्या जैसी अशुभ तिथि को उन्होंने शुभ बना दिया। भगवान महावीर स्वामी की अमावस्या तिथि से प्रेरणा लेकर प्रथमाचार्य चारित्र चक्रवती आचार्य श्री शांति सागर जी ने भी 12 वर्ष की नियम संलेखना अमावस्या के दिन ही ली आचार्य श्री ने बताया कि अमावस्या के दिन भगवान का निर्वाण हुआ है इसलिए यह दिन पवित्र और पावन है ।यह मंगल देशना आचार्य शिरोमणि वात्सल्य वारिघि पंचम पट्टाधीश श्री वर्धमान सागर जी महाराज ने 24 वे तीर्थंकर श्री महावीर स्वामी के 2550 वे निर्वाण वर्ष के अवसर पर बीसा हूमड भवन में आयोजित धर्म सभा में प्रकट की।



आचार्य श्री ने आगे बताया कि जिस प्रकार देश को चलाने के लिए संविधान बना है, कानून बना है, उसी प्रकार तीर्थंकर भगवान के माध्यम से गणघर स्वामी ने जिनवाणी और आगम के माध्यम से संविधान और नियम बनाए हैं। कि आपको क्या करना चाहिए क्या कार्य नहीं करना चाहिए, कैसे उठना, बैठना ,चलना, सोना, कार्य करना चाहिए ।उसके सिद्धांत बने हैं बड़ी दुखद स्थिति है कि आज शास्त्रों में उल्लेखित संविधान को समाज भूलते जा रहा है। धर्म की संस्कृति नियम की आप उपेक्षा कर रहे हैं जिनवाणी के बदले जनवाणी का प्रचलन हो रहा है ,मनमानी चल रही हैं,जबकि श्री महावीर स्वामी के उपदेश , नियम का पालन करना अनिवार्य है।



इस अवसर पर आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने 50 वर्ष पूर्व दिल्ली में आयोजित श्री महावीर स्वामी के 2500 वे महोत्सव का उल्लेख किया कि आचार्य शांति सागर जी महाराज की परंपरा के पट्टाचार्य दीक्षा गुरु आचार्य धर्म सागर जी महाराज के प्रमुख सानिध्य में श्री महावीर स्वामी का 25 00 वा महोत्सव पूरे देश में मनाया गया ।आचार्य श्री धर्म सागर जी महाराज को सभी होने वाले कार्यक्रमों की जानकारी मिलती थी और जो उन्हें उचित लगता था उसकी स्वीकृति देते थे कोई बात दिगंबर धर्म के विरुद्ध धर्म संस्कृति के विरुद्ध होती थी तो उसका विरोध कर उसकी सहमति नहीं देते थे।
आचार्य श्री ने बताया कि प्रथमाचार्य चारित्र चक्रवर्ती आचार्य श्री शांति सागर जी महाराज का हम सब पर बहुत उपकार है उन्होंने निर्दोष चर्या का पालन कर चारित्र महाव्रत धारण कर सभी के लिए मुनि धर्म पालन करने का मार्ग प्रशस्त किया। आचार्य श्री शांति सागर जी महाराज का आचार्य पद शताब्दी महोत्सव पूरे देश में मनाया जाना है आचार्य श्री शांति सागर जी महाराज को चारित्र के गणघर, चारित्र चक्रवर्ती है, उन्होंने चारित्र के 6 खंडो पर ही नहीं अनेक खण्डो पर विजय व्रत, उपवास, उपसर्ग , परिषह , जिन धर्म, जिनालय की संस्कृति की रक्षा हेतु 1105 दिन तक अन्न आहार का त्याग, जिनवाणी को तांबे पर अंकित कराना,10 धर्म का पालन आदि अनेक उल्लेखनीय अनुकरणीय कार्य किए। और मुनि धर्म का उद्धार किया।




आचार्य श्री ने जीवन के निर्माण के लिए एक सूत्र दिया कि आपको जीवन में धर्म धारण करना, धर्म की जागृति जरूरी है इसके लिए आपको उत्साह पूर्वक शक्ति को संकल्प को जागृत करना होगा। संकल्प में बहुत बड़ी शक्ति है संकल्प से ही उत्साह जागृत होता है जिस प्रकार आप व्यापार में सफलता संकल्प और उत्साह से प्राप्त करते हैं उसी प्रकार धार्मिक क्षेत्र में भी पुरुषार्थ कर संकल्पित होकर धर्म धारण करें इससे आपके जीवन में पुण्य की वृद्धि होगी ।
आचार्य श्री ने यही बताया की जिनवाणी में जो संविधान बनाए नियम बने हैं उसके अनुसार रत्न त्रय सम्यक दर्शन , सम्यक ज्ञान, सम्यक चारित्र को जीवन में धारण कर आज भगवान के निर्वाण महोत्सव पर यही संकल्पित हो कि हम जीवन का निर्माण करेंगे ।जीवन के समुचित निर्माण से भविष्य में आपका भी निर्वाण हो सकता है।




उदयपुर नगर से ही अनेक भव्य जीवों ने भी धर्म को धारण कर संकल्पित होकर जीवन का निर्माण किया है जीवन का निर्माण व्रत संयम से होता है फैशन से नहीं होता है फैशन से जीवन का पतन होता है इसलिए जीवन को ऊपर उठना है तो पुरुषार्थ जागृत कर उत्साह और संकल्प की जरूरत है इसी मंगल भावना और कामना के साथ धर्म का कार्य उत्साह पूर्वक करें तभी आपका मानव जीवन सार्थक होगा। शांति लाल वेलावत पारस चितोड़ा सुरेश पद्मावत अनुसार इस अवसर पर पुण्यार्जक परिवारो द्वारा तीन सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान ,और सम्यक चारित्र के प्रतिक श्री महावीर स्वामी को निर्वाण लाडू आचार्य श्री के सानिध्य में चढ़ाए गए इसके पूर्व श्री महावीर स्वामी की पूजन की गई । इन्ही परिवारों के द्वारा आचार्य श्री के चरण प्रक्षालन कर जिनवाणी भेट की गई ।
श्री महावीर स्वामी के अभिषेक के बाद श्री महावीर स्वामी की पूजन आर्यिका श्री महायश मती ने कराई।संचालन डा राजेश ने किया ।आचार्य वर्धमान सागर जी की संघस्थ शिष्या उदयपुर गौरव आर्यिका श्री मुदित मति माताजी के गृहस्थ अवस्था के परिजन
ऋषभ जैन (मुंगडिया )श्रीमती रेखा, डा प्रद्युम्न,गौरव, अभिनव
द्वारा अनिंदा पारसनाथ के पास शांति सागर वर्धमान मुदित ध्यान केंद्र का निर्माण करने के लिए आचार्य श्री से आशीर्वाद लेकर संकल्प धारण किया। आज प्रातः 4 बजे आचार्य संघ ने चातुर्मास कलश का निष्ठापन किया। आज उदयपुर के सभी मंदिरों में श्री महावीर स्वामी का अभिषेक पूजन कर निर्वाण लाडू चढ़ाए गए
राजेश पंचोलिया इंदौर वात्सल्य भक्त परिवार से प्राप्त जानकारी
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
