मार्दव का अर्थ मृदुल स्वभाव होता है चैत्यसाग़र जी

धर्म

मार्दव का अर्थ मृदुल स्वभाव होता है चैत्यसाग़र जी
आगरा
दिगंबर जैन समाज के दशलक्षण पर्व के दूसरे दिन गुरुवार को मंदिरों में उत्तम मार्दव धर्म की पूजा की गई| इस दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया| परम पूज्य आचार्य चैत्यसागर जी महाराज ससंघ के सानिध्य में श्री 1008 अग्रवाल दिगंबर जैन बड़ा मंदिर मोती कटरा में श्रीजी का जिन अभिषेक एवं शांतिधारा की गई| इंद्र इंद्रनिया के स्वरूपों ने अर्घ्य द्रव्य की थाल सजाकर संगीतमय में उत्तम मार्दव धर्म की पूजन की गई| आचार्य श्री 108 चैत्यसागर जी महाराज ने उत्तम मार्दव धर्म पर बताया कि मार्दव का अर्थ मृदुल स्वभाव होता है। मान को मधुर स्वभाव से जीता जाता है।लोग मान को बचाने के लिए मार्दव धर्म खो देते हैं| रात को जिनेंद्र भगवान की मंगल आरती की गई| सांस्कृतिक कार्यक्रम में विजया विमल महिला मंडल के द्वारा फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता आयोजित की गई| वही श्री 1008 महावीर दिगंबर जैन मंदिर कला कुंज मारुति स्टेट में दशलक्षण पर्व के दूसरे दिन पंडित शुभम जैन शास्त्री जी ने उत्तम मार्दव धर्म पर कहा कि क्रोध जीवन के लिए आग और अंदरूनी जहर है क्रोध त्याग शांति और संतोष को आत्मसात करें| वही श्री चंद्रप्रभु दिगंबर जैन मंदिर कटरा इतवारी खां नाई की मंडी में दशलक्षण पर्व के दूसरे दिन उत्तम मार्दव धर्म पर भक्तों ने श्री जी की श्रीजी का अभिषेक एवं शांतिधारा कर पूजा अर्चना की| मीडिया प्रभारी शुभम जैन ने बताया कि दशलक्षण पर्व के तीसरे दिन शुक्रवार को उत्तम आर्जव धर्म की पूजन एवं रात में सांस्कृतिक कार्यक्रम सभी जैन मदिरों में होगे| इस अवसर पर राकेश जैन परदेवाले,विवेक जैन,दीपक जैन,हुकम जैन,संजीव जैन,तरुण जैन,शोभित जैन, अंकुर जैन पीयूष जैन,अनिल जैन,रवीन्द्र जैन,राजीव जैन, अजय जैन,चंचल जैन,पुष्पा जैन,डोली जैन, सुनीता जैन, अर्चना जैन समस्त सकल दिगंबर जैन समाज के स्थानीय भक्तों ने सभी जिनालयों में उपस्थित रहे|
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी

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