श्रद्धा पूर्वक भक्ति करें न कि दिखावे की भक्ति*मुनि शिवानन्द महाराज
कामा
वर्तमान में संस्कारों का बीजारोपण कम उम्र में ही किया जाना अति आवश्यक है। बचपन से ही अभिभावकों को अपने बच्चों में धर्म के संस्कार प्रदान किये जाने चाहिए। बचपन के संस्कारो का जीवन मे गहरा प्रभाव तो होता ही साथ ही वे अंत तक प्रभाव शाली होते हैं।
उक्त प्रवचन कामां के शांति नाथ दिगम्बर जैन दिवान मन्दिर में जैन मुनि ज्ञानानंद महाराज ने गुरु भक्ति के दौरान व्यक्त किये। मुनि श्री ने कहा कि जैन समाज कामां धर्म के क्षेत्र में आगे बढ़ रहा है। आपको एकता के सूत्र में बंध कर नगरी में संतो का आगमन कराना चाहिए क्योंकि सन्तो के आने से संस्कार स्वयं चले आते हैं और धार्मिक क्रियाओं में संलग्न होने से पुण्य की प्राप्ति भी होती है।

इस अवसर पर आचार्य वसुनंदी महाराज के प्रियाग्र शिष्य मुनि शिवानन्द महाराज ने कहा कि गुरुओं का सत्संग अच्छा लगता है क्योंकि गुरु ही जीवन की दशा और दिशा में परिवर्तन करते हैं। आपको भी पूर्ण श्रद्धा के साथ गुरू के प्रति समर्पित होना चाहिये क्योंकि समर्पण ही जीवन का सार है। वर्तमान में श्रावक भक्ति तो करते हैं किंतु उसमें श्रद्धा कम दिखावा ज्यादा नजर आता है अतः अपने लक्ष्य को साध अग्रसर होना और भटकाव को दूर करना चाहिए।
धर्म जागृति संस्थान के अध्यक्ष संजय सर्राफ ने बताया कि बोलखेड़ा से मुनि संघ के आगमन पर गुरुभक्ति कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ नमन जैन के मंगलाचरण से हुआ तो वही छोटी बच्चीयों ने सांस्कृतिक प्रस्तुति दी। इस अवसर पर कार्यक्रम का संचालन करते हुए संजय जैन बड़जात्या ने कहा कि गुरुओं की वाणी का जो रसपान करते हैं,वास्तव मे वही जीवन के सोपान चढ़ते हैं। कार्यक्रम में जैन समाज के पूर्व संरक्षक सत्येंद्र जैन ने मुनि संघ का कामां आगमन पर आभार प्रकट किया।
कामां से नंदगांव हुआ पद विहार शुक्रवार को अल सुबह मुनि ज्ञानानंद,मुनि संयमा नंद,मुनि शिवानन्द,मुनि प्रश्मानंद सहित 6 साधुओं का कामां के विजयमती त्यागी आश्रम से नंदगांव के लिए पद विहार हुआ तो जैन मित्र मंडल, युवा परिषद,धर्म जागृति संस्थान के युवाओं ने जयकारो से मुनि संघ को विदाई दी।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
