पूज्य निर्यापक श्रमण मुनि श्री प्रशांत सागर महाराज की हुई समाधि
चंपापुर
आचार्यश्री विद्यासागर जी महाराज के शिष्य निर्यापक श्रमण मुनिश्री प्रशांत सागर जी महाराज जी की सिद्धक्षेत्र श्री चम्पापुर पर समाधि हुई।
आपने सम्मेद शिखर तीर्थ पर रहते हुए मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज द्वारा निर्मित गुणायतन परिसर में रहे। जब आपने पूज्य मुनि श्री से विदाई ली तो आप बहुत भावुक थे और आपने यह कहा हमें मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज से बहुत कुछ ज्ञानार्जन हुआ है।
हमने भी कुछ दिन पूर्व उनके दर्शन किए और मुनि श्री ने ज्ञानार्जन करने और पाठशाला ओं का संचालन करने की प्रेरणा सभी को दी। उन्होंने रामगंज मंडी के आकाश शास्त्री को एक ग्रंथ भी प्रदान किया था कि इसका अध्ययन कर औरों को भी इसका अध्ययन कराकर धर्म प्रभावना करें। हमें उनके चरण सन्निधि में रहने का शुभ अवसर मिला उनकी मंगल आशीष मिली। उनकी मधुर मुस्कान आज भी हमारी स्मृति पटल पर अंकित है। पूज्य श्री का प्राणी मात्र के लिए जैन जगत के लिए जो योगदान है वह सदा स्मरणीय रहेगा।
निर्यापक मुनि श्री प्रशांतसागर महाराज का नरसिंहपुर जिले के *गोटेगांवमें 3 जनवरी 1961 को उनका जन्म हुआ था। बीकॉम प्रथम वर्ष तक शिक्षित थे। गृहस्थ अवस्था में उनका नाम राजेश जैन था पिता देवचंद जैन और माता सुशीला जैन के सात बच्चों में उनका क्रम चौथा था।
18 फरवरी 1989 को ब्रह्मचर्य व्रत लिया था।क्षुल्लक दीक्षा 16 मई 1991 को मुक्तागिरी में हुई थी
ऐलक दीक्षा 25 जुलाई 1991 को मुक्तागिरी में हीं हुई थी
मुनि दीक्षा 16 अक्टूबर 1997 शरद पूर्णिमा के दिन सिद्धोदय सिद्धक्षेत्र नेमावर में हुई थी
अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
