दीपो की पंक्ति में ही छुपा हुआ है दीपावली का वास्तविक महत्व।
यद्यपि दीपक का उर्ध्व प्रकाश संसार की सारी महत्वाकांक्षा से परे एक अलौकिक दिव्य शक्ति को प्रकाशित करता है।
वह प्रकाशित पुंज अंतिम तीर्थेश शासननायक भगवान महावीर स्वामी के निर्वाण महोत्सव के रूप में पथ का अद्वतीय संचालन का रहा है।
आज सेलगभग 2550 वर्ष पूर्व भगवान महावीर स्वामी ने संसार के सभी जीवों के कल्याण हेतु जियो और जीने दो का उपदेश दे आज संसार में अंहिसा का अत्युत्कृष्ट मार्ग प्रदर्शित कर कार्तिक कृष्ण अमावस्या की प्रात:काल निर्वाण को प्राप्त कर उस अमावस्या को भी धन्य कर दिया।
तथा उनके ही अनुयायी गौतम गणधर स्वामी को गौधूली वेला में केवलज्ञान की प्राप्ति हुई।

उनके देशना जीवों के कल्याण के लिए थी परंतु वर्तमान में बारूद, पटाखे एवम अनेक जीव विज्ञान के विरोधी तथ्यों ने जन्म ले आज बहुत बड़ी विसंगति पैदा कर दी है।प्रत्येक माता पिता को भगवान महावीर के संदेशों से अपने बच्चो के अवगत करा संस्कारों का बीजारोपण करना चाहिए

आज विश्व में भगवान महावीर स्वामी के 2550 वा निर्वाण महोत्सव एवम् गौतम स्वामी के केवलज्ञान के उपलक्ष्य में यह दीपावली का पर्व मनाते है
आज के दिन श्रावक प्रातःकाल महावीर स्वामी की पूजन कर निर्वाण लाडू चढ़ाते है और सायंकालीन वेला में दीपों की आवली के माध्यम से सम्पूर्ण विश्व में शांति की भावना और संसार का क्षय कर निर्वाण को प्राप्त करने की भावना भाते है।
मन में उमंग और तन के स्वास्थ्य का परिधान पहन परिवार में खुशियों की बौछार बिखेरता हुआ यह दीपावली पर्व सबके जीवन को मंगल मय करे।
लेखक हेमंत कुमार जैन assitant प्रोफेसर
