कालानुक्रमिक गणना में वीर निर्वाण सम्वत सबसे प्राचीन,प्रत्येक जैन अनुयायी को करना चाहिए गौरव
भगवान महावीर स्वामी के 2550 वें निर्वाण पर विशेष आलेख
जैन धर्मावलम्बियों को इस बात का गौरव होना चाहिए कि वीर निर्वाण संवत काल गणना का सबसे प्राचीन कलेंडर है। वीर निर्वाण संवत (युग) 7 अक्टूबर 527 ईसा पूर्व से शुरू होने वाला एक कैलेंडर युग है। यह 24 वें जैन तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी के निर्वाण का स्मरण कराता है । यह कालानुक्रमिक गणना की सबसे पुरानी प्रणाली है जिसका उपयोग आज भी भारत में किया जाता है । कार्तिक मास शुक्ल पक्ष की प्रथमा अर्थात कार्तिक सुदी प्रतिपदा को वीर निर्वाण सम्वत का प्रारम्भ होता है।

जैन पत्रकार महासंघ के राष्ट्रीय सांस्कृतिक मंत्री संजय जैन बड़जात्या के अनुसार 14 नवम्बर 2023 को वीर निर्वाण सम्वत 2550 का प्रारम्भ हो रहा है उससे पूर्व 2549 वर्ष का समापन एवं जैन संतो व साध्वियों के वर्षायोग का भी समापन हो रहा है। भारत मे वैसे तो 60 सम्वत हैं किंतु दो सम्वत विक्रम व शक सम्वत प्रचलन में है।

काल की गणना के अनुसार वीर निर्वाण सम्वत की तुलना विक्रम संवत से करें तो चैत्र मास शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से कार्तिक मास की अमावस तक 469 वर्ष व कार्तिक मास शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से चैत्र मास की अमावस तक 470 वर्ष जोड़ने पर वीर निर्वाण सम्वत प्राप्त होता है इसी प्रकार शक सम्वत में 605 वर्ष जोड़ने पर वीर निर्वाण वर्ष की गणना की जाती है। सीधी भाषा में समझे तो 14 नवंबर को वीर निर्वाण संवत 2550, विक्रम संवत 2080,शक संवत 1945 एवं ईसवी 2023 है।

सभी जैन मतावलंबियों को वर्तमान शासन नायक,चौबीसवें एवं अंतिम तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी का 2550 वां निर्वाण महोत्सव बड़ी धूमधाम,आध्यात्मिकता एवं धर्म प्रभावना के साथ आयोजित करना चाहिए संपूर्ण विश्व को यह परिचित कराना जरूरी है कि जैन धर्म भगवान महावीर से नहीं अपितु प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव से प्रारंभ हुआ।



जो की अनादि निधन और सबसे अधिक प्राचीन है। जैन संस्कृति की जड़े बहुत गहरी है जिनके संरक्षण संवर्धन और विकास की वर्तमान में महती आवश्यकता है।
लेखक संजय जैन बड़जात्या कामां
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
