पटाखों का त्याग करेंगे तो हमें स्वच्छ एवं सुंदर वातावरण, पर्यावरण मिलेगा भावासागर महाराज
घाटोल
पूज्य मुनिश्री 108भावसागर महाराज ने अपने उद्बोधन ने फटाको का त्याग करने की और प्रेरित किया।
उन्होंने कहा कि इससे आर्थिक नुकसान के साथ-साथ शारीरिक हानि पहुंचती है। और जो बेजुबान पक्षी होते हैं वह भी भयभीत होते हैं। और प्रतिवर्ष कई अग्निकांड होते हैं। लाखों करोड़ों का नुकसान होता है। करुणामई शब्दों में पूज्य श्री ने कहा कि यहां तक के कई बच्चे भोले भाले अपनी जीवन लीला तक समाप्त कर लेते हैं। इसका त्याग करने से हमें स्वच्छ,सुंदर, वातावरण एवं पर्यावरण मिलेगा।

उन्होंने जोर देते हुए कहा कि हमारी गली मोहल्ला, नगर ,शहर गांव, कॉलोनी इसे स्वस्त बनेगी। साथ ही साथ रासायनिक जहरीली गैसें व धुए के प्रदूषण से भी बचाव होगा। उन्होंने कहा कि पटाखे बेचने एवं खरीदने का त्याग कर देते हैं तो असंख्यात जीवो के पाप से बच सकते हैं।

महाराज श्री ने कटाक्ष करते हुए कहा कि करोड़ सूक्ष्म जीवों ने हमारा और आपका क्या बिगाड़ा है। हम पटाखे फोड़ कर उन सूक्ष्म जीवों को क्यों मारे, क्यों लाखों भवों के बैर का बंध करे। हम करोड़ जीवन को अभयदान दे। हम पटाखों के बिना भी तो दिवाली मना सकते हैं।


पटाखे की आवाज के विषय में बोलते हुए कहा कि इनकी आवाज इतनी तेज होती है कि इसे सुनने की क्षमता भी बाधित होती है। विशेष कर बच्चों बुजुर्गों पर इन पटाखों की आवाज का कुछ ज्यादा ही असर पड़ता है। जिन फटाखो को चलाकर हम इतने सारे जीवो की हिंसा करते हैं। यदि वह धन बचाकर गरीब लोगों को मिठाई, वस्त्र, औषधि और अन्य वस्तुएं अर्पण कर सकते हैं। पटाखों का धुआं बादल बनकर हमारे वायुमंडल को नुकसान पहुंचा रहा है। एक प्रश्न चिन्ह खड़े करते हुए महाराज श्री ने कहा कि ऐसे कितने घर है, जहां आर्थिक टंकी के कारण घरों में चिराग तक नहीं जल पाते और हम पटाखे चलाते हैं।

दीपावली में हो रही हजारों दुर्घटनाओं का कारण पटाखे हैं। कितने बच्चे युवा अपंग हो रहे हैं। प्रतिवर्ष देश भर में 6000 करोड रुपए से अधिक के पटाखे फोड़े जाते हैं। पटाखों के धुएं से वायुमंडल में सल्फर डाइऑक्साइड, और कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा ए गुना तक बढ़ जाती है। जो सभी के स्वास्थ्य के लिए घातक है। बच्चे बुजुर्ग बीमार व्यक्ति इससे ज्यादा प्रभावित होते हैं।

दीपावली पर पटाखे नहीं खरीद कर गरीब लोगों को मिठाई वस्त्र औषधि और अन्य वस्तुएं अर्पण करें जिससे वह भी दिवाली मना सके।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
