“किसी को जबरन या प्रताड़ित करके धर्ममार्ग पर नहीं लगा सकते बल्कि उसका हृदय परिवर्तन करो” संकल्प सागर महाराज
विदिशा
किसी को जबरन या प्रताड़ित करके धर्ममार्ग पर नहीं लगा सकते, बल्कि उसका हृदय परिवर्तन करो” उपरोक्त उदगार मुनि श्री संकल्प सागर जी महाराज ने जैन भवन किरीमौहल्ला मे प्रातःकालीन प्रवचन सभा में व्यक्त किये।
उन्होंने कहा कि यदि कोई धर्म से च्यूत हो रहा है तो उसे वात्सल्य पूर्वक समझाकर पुनः धर्म मार्ग पर लाया जा सकता है। उन्होंने उदाहरण देते हुये बताया कि जब पुष्पडाल मुनि धर्म मार्ग से विचलित हो रहे थे, तो वारिषेण मुनि जो कि राजा श्रैणिक और रानी चेलना के पुत्र थे महल में खबर पहुंचाई की महाराज अपने मित्र मुनि पुष्पडाल के साथ महल में आ रहे है, सभी रानियों को सोलह श्रंगार के साथ उपस्थित रहने को कहा हैं,तो महारानी चेलना को चिंता हुई कि कही उनका पुत्र धर्म मार्ग से विचलित तो नहीं हो रहा है। उन्होंने परीक्षा लैने के एक सोने का तथा दूसरा काष्ट का सिंहासन लगवाया, मुनि श्री निश्चित समय महल में पधारे। अपने मित्र पुष्पडाल को स्वर्ण सिंहासन पर बैठाकर स्वं काष्ट के सिंहासन पर बेठे तो रानी चेलना के मन को शांति मिली, एवं मुनि पुष्पडाल से रानियों का परिचय कराया तो वह समझ गये और उनको अपनी गलती का अहसास हुआ,
मुनि श्री ने कहा कि धर्म से सुख शांति मिलती है,तथा विचारों की पवित्रता से तथा धैर्य धारण करने से आत्मा का विकास होता है तथा आऐ हुये संकटों से बचा जा सकता है। इस अवसर पर मुनि श्री सदभाव सागर जी महाराज ने कहा कि “संसार में आज तक ऐसा कोई मनुष्य नहीं हुआ कि कर्म वो करे और फल किसी ओर को मिले,उन्होंने कहा कि दूसरों के दोषों पर दृष्टि मत डालो उनके दोषों को सुधारने के स्थान पर अपने दोषों पर दृष्टि डालोगे तो उसका भला भी हो जायेगा और खुद का भी भला होगा।उन्होंने कहा कि ईश्वर को कर्ता मत बनाओ वल्कि कर्म वादी बनो,और कर्म सिद्धांत पर भरोसा करो उन्होंने कहा कि
इच्छाओं की पूर्ती में कभी अपने नियमों को मत तोड़ना। जो व्यक्ती जितना सहज और सरल होता है,वह उतना ही मोक्ष के करीब होता है,इसलिये सरल और सहज बनना चाहिये।लहरों में जैसे मोती दिखाई नहीं देता उसी प्रकार अस्थिर चित्त में आत्मा रुपी मोती दिखाई नहीं देता।धर्मात्मा के वेश में आकर यदि आपने छल कपट किया तो कर्म आपको छोड़ने वाले नहीं है। अपने उपकारी के उपकार को कभी भूलना नहीं चाहिये यदि आप सत्य है तो कोई आपका बाल भी बांका नहीं कर सकता। उपरोक्त जानकारी देते हुये प्रवक्ता अविनाश जैन ने देते हुये बताया मुनि श्री महावीर जिनालय किरीमौहल्ला में विराजमान है।प्रतिदिन8:30 से मुनसंघ के प्रवचन हो रहे है।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
