उपवास से जीवन में क्षमा, सरलता ,मृदुता अर्जित करें तथा अहंकार ,नाम ,यश ,प्रशंसा की भावना नहीं लावे तभी उपवास सार्थक होगाआचार्य श्री वर्धमान सागर जी

धर्म

उपवास से जीवन में क्षमा, सरलता ,मृदुता अर्जित करें तथा अहंकार ,नाम ,यश ,प्रशंसा की भावना नहीं लावे तभी उपवास सार्थक होगाआचार्य श्री वर्धमान सागर जी
उदयपुर
आचार्य शिरोमणि आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने उदयपुर में 10 लक्षण पर्व पर रत्नत्रय दिवस पर उपवास करने वाले तपस्वीयो को धर्म सभा को संबोधित कर बताया कि कर्म बंध परिणाम के कारण होता है ,आत्मा कर्मों से बंधी है तप से कर्मों की निर्जरा होकर नवीन कर्म का बंघ नहीं होता ,आप लोगों में किसी ने 64, 32 ,16, 10 से के उपवास लगभग 60 से अधिक लोगों ने किए हैं ।तप से जीवन में साहस और उत्साह के साथ जीवन को सार्थक करने का प्रयास किया है। प्रतिदिन अभिषेक पूजन के माध्यम से धर्म में उपयोग लगाकर भाग लिया आचार्य श्री ने आगे देशना में बताया कि यह सभी के लिए अनुकरणीय है जिन्होंने उपवास किया उनके लिए कल भी संदेश दिया था कि अपने लंबे समय तक तप धर्म धारण कर उपवास किया यह तभी सार्थकता को प्राप्त होगा कि छोटे-छोटे नियम लेकर जीवन को संयमित करें जिन्होंने उपवास किए हैं उन्हें जमीन कंद और रात्रि भोजन का त्याग करना चाहिए।

 

 

 

 

क्योंकि वस्तु को शुद्ध करने के लिए अग्नि में तपाते हैं ,आभूषण भी स्वर्ण के बनते हैं उसकी कालिमा को अग्नि में तपाकर दूर किया जाता है ।उसी प्रकार आत्मा को भी शुद्ध करने के लिए कषाय कर्म रूपी कालिमा को तप के माध्यम से दूर किया जाता है। पर्व कर्म बंधन से छूटने का माध्यम है। आपको आवश्यकता है कि श्रावक व्रत का पालन करें तभी तप सार्थक होगा

यदि आपने उपवास किए हैं और उस दौरान टीवी मोबाइल में लग रहे तो इससे नवीन कर्मों का आश्रव किया है इसलिए जीवन में बुराइयां दूर करने का प्रयास करें जो की आत्मा का नुकसान करती है। शरीर को अपना मानना गलत है शरीर और आत्मा पृथक है जो भी धर्म क्रिया करें उस कर्म बंधन नहीं होकर कर्मों का क्षय होना चाहिए तपस्वी शब्द का उपयोग मुनिराज् के लिए है किंतु आप तप करने वालों को तपस्वी निरूपित किया गया है इसलिए आपको तपस्वी शब्द का सम्मान बनाकर रखना होगा।

तत्वार्थ सूत्र का पहला सूत्र रत्नत्रय बताया है। घर पर पानी ऊपर चढ़ने के लिए आप 3 या 5 एचपी की मोटर से ऊपर पानी चढ़ाते हैं उसी प्रकार आत्मा को ऊपर उठने के लिए रतनत्रय सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान, सम्यक चारित्र धर्म रूपी मोटर से जीवन को ऊपर उठाएं तप से जीवन में अहंकार नाम यश प्रशंसा नहीं होना चाहिए वरन जीवन में क्षमा ,मृदुता और सरलता होना चाहिए तभी जीवन उन्नती को प्राप्त होता है भगवान से यही भावना भावे कि आगे भी हम तप करेंगे आचार्य श्री ने बताया कि आज पारणे में शक्ति अनुसार उपवास के अनुकूल भोजन सामग्री लेवे ताकि शरीर स्वस्थ रहे। अध्यक्ष शांति लाल वेलावत,सुरेश पद्मावत सचिव अनुसार आचार्य श्री की धर्म देशना के बाद सकल दिगंबर जैन समाज ने सभी तपस्वियों की शोभायात्रा हूमड़ भवन से निकाली जिसमे तप करने वालो को बग्धी में बिठाया गया।जिसमे समाज के हजारों लोगों ने उपस्थित रहकर तप की अनुमोदना की।

 

 

समापन नगर निगम परिसर में हुआ। जहा पर सकल जैन समाज ने सभी तपस्वियों का बहुमान कर स्मृति चिन्ह भेट किए कार्यक्रम का प्रभावी संचालन डा राजेश एवम प्रकाश सिंघवी ने किया।सभी 6 समाज के अध्यक्ष द्वारा दीप प्रवज्जलन एवम् चित्र अनावरण किया गया।

राजेश पंचोलिया वात्सल्य भक्त परिवार से प्राप्त जानकारी
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी

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