आदिनाथ भगवान के जन्म एवं तप कल्याणक महोत्सव पर भावभीनी अभिव्यक्ति
प्रथम सूर्य ने आदि जिनेश्वर आदिनाथ भगवान
आदिश्वर है ऋषभदेव सबके प्राण
सत्य को खोजा सत्य को जाना
सत्य का अनुसंधान किया
तेरे बाद इस धरती पर 24 तीर्थंकर आए।

आज हम प्रथम तीर्थंकर आदिनाथ भगवान का जन्म उत्सव मना रहे है।भगवान आदिनाथ ने बताया था की ऋषि बनो या कृषि करो। उन्होंने स्थापत्य कला वह लिपि का ज्ञान कराया जिसके द्वारा हमें भाषा का बोध हुआ। बोलना लिखने का ज्ञान सभी को बताया।
।भगवान ऋषभदेव ने पहली बार लोगों को कृषि कर्म से अवगत करवाया तथा भाषा लिपि के बोलने व लिखने के बारे में उन्हें ज्ञान दिया.

प्रभु आदिनाथ ने ही. बर्तन बनाना, स्थापत्य कला, शिल्प, संगीत, नृत्य और आत्मरक्षा के लिए शरीर को मजबूत करने के गुरु सिखाए. साथ ही सामाजिक सुरक्षा और दंड संहिता को पहली बार भारतीय समाज से अवगत करवाया था.
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
