तपे बिना प्रशंशा नही मुनि श्री

धर्म

तपे बिना प्रशंशा नही मुनि श्री

घाटोल
वासुपूज्य दिगंबर जैन मंदिर मे आचार्य विद्यासागर महाराज के
शिष्य मुनि विमल सागर,अनन्त सागर, धर्मसागर, भावसागर महाराज के सानिध्य में एवं ब्रह्मचारी रजनीश भैया रहली के निर्देशन में दशलक्षण महापर्व के अंतर्गत उत्तम तप धर्म के अवसर पर प्रातः काल मांगलिक क्रियाएं संपन्न हुई

दोपहर में मुनि अनंत सागर महाराज के द्वारा सामयिक पाठ की कक्षा का लाभ मिला,इसके बाद तत्वार्थ सूत्र का वाचन चल रहा है और मुनि विमल सागर महाराज के द्वारा तत्वार्थ सूत्र ग्रंथ की व्याख्या चल रही है,शाम को मुनि भाव सागर महाराज के द्वारा ध्यान एवं प्रातः काल की बेला में प्रभात फेरी निकाली जा रही है जिसमे बच्चे उत्साह पूर्वक शामिल हो रहे है मुनि विमल सागरजी द्वारा ध्यान करवाया जा रहा है,रात्रि में प्रतिदिन ब्रह्मचारी भैया जी के प्रवचन और रात्रि में जैन गोट टैलेंट सेकंड पार्ट में प्रतियोगिता में आचार्य विद्यासागर महाराज का स्केच चित्र बना कर सभी को मंत्र मुग्ध कर दिया सांस्कृतिक कार्यक्रम,प्रतियोगिता चल रही है,

 

 

इस अवसर पर धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि श्री विमल सागर महाराज ने कहा कि कई लोगों सोलह उपवास करने का भाव बनाया है यह बहुत बड़े साहस का कार्य है, दृढ़ता के साथ जो कार्य करते है वह आगे बढ़ते जाते है, तप से आत्मा की शुद्धि होती है, भूख को जो जीत लेता है वह महान होता है, दान,पूजा श्रावक का तप है,

 

 

मुनि अनंत सागर महाराज ने कहा कि जो कर्मो के क्षय के लिए किया जाता है वह तप कहलाता है, ख्याति, पूजा, लाभ से रहित उत्तम तप माना जाता है, उपवास करने वालो को गिफ्ट, मंच,माला आदि की भावना नहीं रखनी चाहिए,

 

 

कमेटी को सम्मान करना चाहिए, तप के बिना सुगंधी नही आती है, तप के बिना प्रशंशा नही मिलती है

संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी

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