स्वाध्याय सम्राट अंतरंग तपस्वी महागुरु का 42वा मुनि दीक्षा दिवस 5 फरवरी 2022-*

धर्म

 

*स्वाध्याय सम्राट अंतरंग तपस्वी महागुरु का 42वा मुनि दीक्षा दिवस 5 फरवरी 2022-*

*विश्व के दुर्लभ आश्चर्यो में से एक जिनयसो के जीनियस वैज्ञानिक धर्माचार्य श्री कनकनन्दी जी गुरूराज*

वात्सल्यरत्नाकर आचार्य श्री विमलसागर जी,गणाधिपति गणधराचार्य श्री कुंथुसागर जी,मर्यादा शिष्योत्तम आचार्य श्री भरतसागर जी व प्रथम गणिनी आर्यिका श्री विजयमती माताजी जैसे युगश्रेष्ठ सन्तो द्वारा तराशे व निखारे गए *वैज्ञानिक धर्माचार्य श्री कनकनन्दी जी गुरूराज* जिन पर विश्व सन्त आचार्य श्री देशभूषण जी ,श्वेतपिच्छाचार्य श्री विद्यानन्दी जी व अभिक्ष्णज्ञानोपयोगी आचार्य श्री अभिनन्दन सागर जी ऋषिराज जैसे धर्म धुरंधरों का भी अटूट वरदहस्त रहा।

*आश्चर्य किंतु सत्य👇*
ऐसे पूज्यपाद आचार्य श्री कनकनन्दी जी गुरुदेव जिन्होंने अपने अद्वितीय ज्ञानबल,पूर्ण निस्पृहता,अत्यंत सादगी,बिना आडम्बरो-बिना प्रदर्शनों के,बिना बड़े बड़े मंच पांडाल के,प्रतिज्ञा पूर्वक बोलियों से रहित वर्षायोग से लेकर समस्त धर्म कार्यो से,बिना किसी चंदे चिट्ठे व याचना के,बिना किसी मठ भौतिक निर्माण से,बिना किसी निमंत्रण पत्र पत्रिकाओं से सात समंदर पार तक समस्त पृथ्वी भर में जैन धर्म की वैज्ञानिक प्रभावना कर रहे है जो इस सम्पूर्ण ब्रह्मांड में निस्पृहता की जीवंत मिसाल देते हुए अपने समस्त गुरुओ का गौरव बढ़ा रहे है।

जैन जगत के पूज्यतम महातीर्थो मेसे एक श्रवणबेलगोला में भगवान गोम्म्टेश्वर बाहुबली स्वामी की दिव्यता में लगभग 200 से अधिक सन्तो की गरिमामय उपस्थिति में गणाधिपति गणधराचार्य श्री कुंथुसागर जी ऋषिराज ने 5 फरवरी सन 1981 को अपने संघस्थ विश्वोत्तम होनहार क्षुल्लक जी को मुनि कनकनन्दी जी के रूप में दीक्षित किया।

*आश्चर्य किंतु सत्य👇*
30 भाषाओं के ज्ञाता,375 गहन साहित्यों व 13000 आध्यात्मिक सारभूत कविताओं के रचयिता महाज्ञानी सन्त आप 300 सन्तो के शिक्षागुरु है,आपको जैन दर्शन व विश्व अध्यात्म का चलता फिरता विश्व विद्यालय कहा जाता है।आपने विश्व के समस्त दर्शनों का अध्ययन किया है तथा जैन दर्शन के विविध भाषाओं में समस्त प्राचीन व सैद्धान्तिक ग्रन्थों का गहन सूक्ष्म अध्ययन किया है।
बड़े बड़े वैज्ञानिक,दार्शनिक,प्रोफेसर व न्यायाधीश आपसे ज्ञानार्जन व जिज्ञासा समाधान लेकर विश्व पटल पर जैन दर्शन के विज्ञान का शंखनाद करते है।
*आश्चर्य किन्तु सत्य👇*
भगवान महावीर स्वामी का अनेकान्तवाद,सत्य निस्पृहता व उदारपूर्ण दृष्टिकोण आपका सबसे प्रमुख आभूषण है जिससे देश विदेश के दिगम्बर से ज्यादा श्वेताम्बर के समस्त पंथ सम्प्रदाय,हिन्दू,बौद्ध,ईसाई धर्म के अनेकानेक विद्वान व जिज्ञासु आपके भक्त शिष्य है। यहां तक कि आपके द्वारा रचित साहित्यों पर मुस्लिम विद्यार्थियों ने भी पीएचडी की ओर वे अहिँसा व जेनिस्म के सिद्धांतों की पालना में अग्रसर है।

*आश्चर्य किन्तु सत्य👇*
इतनी महानता,व्यापकता व विलक्षणता से भरपूर होते हुए भी आप प्रतिज्ञा पूर्वक स्व संघ में अवतरण दिवस,दीक्षा दिवस आयोजन हेतु कोई प्रपंच नही होने देते,यहां तक कि पँचकल्याणको व विधानों में होने वाले आडम्बरो,अपव्ययो,धर्म नगण्य व धन-वर्चस्व प्रभावना को देखकर इन समस्त आयोजनों से स्वयं को पूर्णतया दूर कर लिया,आप प्रायः एकांत छोटे छोटे गाँवो में ही विहार व प्रवास करते है वहाँ भी स्व संघ को सादगी से ऐसा संजोया है कि मात्र एक परिवार भी सहजता से आपके संघ का वर्षायोग महापुण्य करा लेता है।
आप इस युग मे जैन दर्शन के सूर्य के समान तेजस्वी नक्षत्र है जिसकी रोशनी से अनेकानेक भव्यात्माए ज्ञानरत्न रूप में जगमगा रहै है।
निश्चित ही आपकी संगति को पाने वाला वर्तमान विश्व मे आपको श्रेष्ठ अंतरंग तपस्वी मानता है जो सबसे कठिन लेकिन आत्मकल्याण के लिए परम आवश्यक तपोसाधना है।

*वर्तमान के अनेको सेकड़ौ श्रमण, जिज्ञासु अतिउच्च शिक्षाविद व मेरे जैसे हजारो हजार सामान्य युवा आप जैसे निर्मल महाज्ञानी सन्त को आराध्य के रूप में मानकर गौरवान्वित है।*

*पूज्यपाद वैज्ञानिक धर्माचार्य श्री कनकनन्दी जी गुरूराज के 42वे दिक्षा दिवस पर अविनाशी नमन*
*शब्दसुमन-शाह मधोक जैन चितरी*
*नमनकर्ता-श्री राष्ट्रीय जैन मित्र मंच भारत*
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