माया कषाय के अभाव में ऋजुता सरलता उत्पन्न होती है ऐलक श्री क्षीरसागर महाराज
रामगंजमंडी
दस लक्षण पर्व का तृतीय दिवस उत्तम आर्जव दिवस के रूप में मनाया गया।
नगर के मंदिरों में अभिषेक पूजन किया गया एवं उत्तम आर्जव धर्म की पूजन हुई।
श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में पूजन उपरांत धर्म सभा के प्रारंभ में मंगलाचरण अनिता जैन द्वारा किया गया। धर्म सभा का संचालन राजीव बाकलीवाल ने किया
पूज्य ऐलक श्री क्षीरसागर महाराज ने उत्तम आर्जव धर्म पर प्रकाश डाला उन्होंने कहा कि माया कषाय के अभाव में ऋजुता सरलता उत्पन्न होती है। उन्होंने कहा जो हम कहते हैं वह हम करते नहीं जो करते हैं वह कहते नहीं। मन में कुटिल भावना रखते है।उन्होंने धर्म के बारे में कहा कि व्यक्ति क्षमा मार्दव धर्म का पालन तो कर सकता है,लेकिन कपट माया के साथ धर्म का व्यवहार नहीं कर सकता। माया की विशेष व्याख्या करते हुए महाराज श्री ने कहा कि माया गड्ढे के समान मिथ्या रूपी अहंकार है। उन्होंने माया शब्द को निषेधात्मक शब्द बताया और इसका अर्थ बताते हुए कहा कि मां का अर्थ है निषेधात्मक या शब्द का अर्थ है ये जो करने योग्य नहीं है।

उन्होंने कहा वह माया प्रशंसनीय कहलाती है। जिससे किसी की हानि ना हो। जैसे घर में पिता के आने पर बच्चे चुपचाप बैठ जाते हैं।और जो माया दूसरे का अहित करने वाली होती हैं।वह माया अप्रशस्त माया कहलाती है। ऐसी माया कपट से बचने का प्रयास करना चाहिए।
कुछ लोग बाहर से कुटिल लेकिन अंदर से साफ होते हैं ऐसे लोग फिर भी सही कहे जा सकते हैं लेकिन जो लोग अंदर बाहर कुटिलता रखते हैं वह नरक का कारण है। चारों ओर माया कपट का जाल दिखाई देता है जो व्यक्ति आर्जव धर्म को अपना लेता है। उसकी सब जगह ख्याति होती है। सरलता ऋजुता के कारण उसकी छाप बन जाती है। उन्होंने कहा कि दगा किसी का सगा नहीं है। कोई हमें ठग ले तो हमे विचार नहीं करना चाहिए समझना चाहिए की परिग्रह कम हुआ है। और पाप भी कम हुआ है। और वही व्यक्ति सुखी होते हैं। ठगने वाले व्यक्ति कभी सुखी नहीं हो सकते और यह संसार भ्रमण करने वाला होता है।


दोपहर की बेला में श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में तत्वार्थ सूत्र का वचन सांगानेर से आए हेमंत शास्त्री द्वारा किया गया। संध्या की बेला में भी महाराज श्री द्वारा प्रतिक्रमण कराया जा रहा है और रात्रि में मंगल आरती को लेकर सभी मदिरो में भक्तों का उल्लास देखते बन रहा है

श्रीमहावीर दिगंबर जैन मंदिर के अध्यक्ष महेंद्र ठौरा एवम महामंत्री पदम सुरलाया से मिली संयुक्त जानकारी के अनुसार आज दशलक्षण पर्व पर प्रथम अभिषेक शांतिधारा का पुण्य लाभ सोहन बाई राकेश मुकेश दिनेश सबद्रा परिवार को द्वितीय शांतिधारा का पुण्य लाभ चारोली देवी दिनेश कुमार कल्पना जैन को प्राप्त हुआ भक्तामर स्तोत्र से मंत्रित 48 दीपकों द्वारा महाआरती का सौभाग्य पुष्पा बाई महावीर कुमार देवेंद्र साकुन्या को मिला
अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट
