हर व्यक्ति शांति चाहता है, और शांति के लिए पुरुषार्थ करता है ऐलक श्री विवेकानंद सागर महाराज
सागर
पारसनाथ जिनालय मोती कटरा में पूज्य ऐलक श्री विवेकानंद सागर महाराज ने कहा कि हर एक व्यक्ति शांति चाहता है और शांति के लिए पुरुषार्थ करता है लेकिन मिलती नहीं।
उन्होंने कहा व्यक्ति को क्रोध में कुछ भी बोध नहीं रहता है और
क्षमता में प्रतिशोध नहीं होता है। व्यक्ति क्रोध में आकर अंधा बन जाता है और क्षमता से ही उसका विवेक जागृत हो जाएगा। हर क्षण,हर समय आपको बंध हो रहा है। कोई शुभ का तो कोई अशुभ का यह पर्यूषण पर्व अशुभ कर्मों को जलाता है और उनका नाश करता है।


एक शिक्षक ने कहा था कि समय की कीमत आपको समझना चाहिए एक उदाहरण के माध्यम से कहा कि जिस प्रकार रस्सी में गांठ लगाना सरल है लेकिन उसे खोलना बहुत कठिन है यह पर्व गांठ खोलना जैसा है आपको कर्म रूपी गांठ खोलने के लिए इस पर्युषण पर्व का उपयोग करना चाहिए।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
