दूसरों के गुणों पर दृष्टि डाले और बुराई से बच्चे तो हम अहंकार से बच सकते हैं। ऐलक श्री क्षीरसागर महाराज

धर्म

दूसरों के गुणों पर दृष्टि डाले और बुराई से बच्चे तो हम अहंकार से बच सकते हैं। ऐलक श्री क्षीरसागर महाराज
रामगंजमंडी
10 लक्षण पर्व के द्वितीय दिवस उत्तम मार्दव धर्म की आराधना की गई। नगर के प्रमुख जिन मंदिरों में पूजन अभिषेक को लेकर भक्तों में उत्साह देखने को मिला।

 

प्रातः कालीन बेला में अभिषेक पूजन उपरांत श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में पूज्य ऐलक श्री 105 क्षीरसागर महाराज उत्तम मार्दव धर्म पर अपना उद्बोधन देते हुए इसका भावार्थ समझाया मंगल उद्बोधन से पूर्व अनीता जैन ने अपना मंगलाचरण प्रस्तुत किया। महाराज श्री ने कहा यह धर्म मान और कपट को दूर करने के लिए कहता है। उन्होंने कहा कि व्यक्ति मान कषाय में अपने को उच्च और दूसरे को तुच्छ समझता है।

 

 

 

 

महाराज श्री ने कहा कि किसी भी प्रशंसा उसके सामने करें निंदा ना करें ऐसा प्रयास करें। व्यक्ति मान की परिणीति में अपने को अलग दिखाने कोशिश करता है। अहंकार में व्यक्ति टूटता है। उन्होंने कहा जो भी व्यक्ति अपने धन के और और रूप का अहंकार करता है वह हमेशा रहने वाला नहीं है एक उदाहरण के माध्यम से कहा कि स्टाक एक्सचेंज में व्यक्ति कहां से कहां पहुंच जाते हैं। अहंकार बहुत खतरनाक होता है। अहंकार कैसा भी हो जाए यदि शक्ति बल का अहंकार हो जाएं तो वह भी एक दिन टूटता है उन्होंने गामा पहलवान का उदाहरण दिया। विनम्रता का ज्ञान अपने मन में उतारे ज्ञान का मद भी नहीं होना चाहिए। सबसे उत्तम ज्ञान केवल ज्ञान हुआ करता है वह ज्ञान हमें नहीं है। ज्ञान विनय गुण से प्रकट होता है। विनय गुण सबको अच्छा लगता है अहंकार किसी को अच्छा नहीं लगता। व्यक्ति अहंकार और मान करके सबको गलत और तुच्छ समझता है। और अपने को ही सब कुछ मानता है। दूसरों का कुछ भी मूल्य नहीं समझता।

व्यक्ति जब पैदा होता है तो उसके मान कषाय प्रमुखता के साथ होता है। लेकिन उसे कम करने का प्रयास करना चाहिए इस मान के कारण लोग कोरोना में जितने भूख से नहीं मरे उतने मान कषाय से मरे।

जीवन में विनम्रता आनी चाहिए विनम्रता से यश होता है विनम्रता का गुण भगवान को भी अच्छा लगता है। ईश्वर को पाना चाहते हो तो दूसरे की प्रशंसा करें। और कहे मैं कुछ नहीं हूं, आप ही सब कुछ हैं। अपने मुख से अपनी प्रशंसा नहीं करना चाहिए। अपनी विशेषता बताकर व्यक्ति मान कषाय को पुष्ट करता है।


दोपहर की बेला में प्रतिदिन महाराज श्री के द्वारा तत्वार्थ सूत्र का वाचन किया जा रहा है। एवं संध्या की बेला में शंका समाधान व प्रतिक्रमण कराया जा रहा है। रात्रि की बेला में श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में पंडित हेमंत कुमार शास्त्री सांगानेर द्वारा शास्त्र प्रवचन किए जा रहें है।

 

रात्रि की बेला में भव्य भक्ति आराधना हो रही है मंगल आरती की जा रही है।


साथ ही बघेरवाल दिगंबर जैन समाज के महामंत्री पदम सुरलाया ने जानकारी देते हुए बताया कि आज पर्व के द्वितीय दिवस पर श्रीमहावीर दिगंबर जैन मंदिर पर प्रथम अभिषेक शांतिधारा का पुण्य लाभ ज्ञानचंद अशोक मनीष विपिन सबद्रा परिवार द्वितीय शांतिधारा का पुण्य लाभ प्रमोद कुमार अंकुश अर्पित अंशुल बाबरिया को प्राप्त हुआ
रात्रि की बेला में महावीर दिगंबर जैन मंदिर में 48 दीपको से मंगल आरती का सौभाग्य महेंद्र कुमार रश्मि ऐश्वर्य अमिता ठौरा को मिला श्री वीर जैन सोशल ग्रुप द्वारा धार्मिक प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार कुसुम ताथेड़िया एवम द्वितीय पुरस्कार रश्मि ठौरा को मिला ।

अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट

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