मृदुलता को काटा नहीं जा सकता अजीत सागर महाराज
सागर
पूज्य मुनिश्री अजीत सागर महाराज ने उत्तम मार्दव धर्म पर बोलते हुए कहा कि लोक में एक प्रसिद्ध है कि कटता वही है जो कठोर है, मृदुलता को काटा नही जा सकता।
उदाहरण के माध्यम से कहा कि लकड़ी कठोर होती है लेकिन कुल्हाड़ी से काटी जाती है, और रुई में मृदुलता युक्त है उसे कोई काटता नही। और उसे अपने मृदु हाथों से बाटते है। मृदुता में सम्मान है और कठोरता में कदम-कदम पर अपमान ही अपमान है।

महाराज श्री ने आगे बोलते हुए कहा कि जरा सोचिए जब प्रत्येक आत्मा में वह भगवान बनने की सत्ता विद्यमान है फिर आत्मा को कठोर शब्दों से उसका अपमान क्यों कर रहे हैं।


धर्म का दूसरा दिन उत्तम मार्दव धर्म है। मृदुता के भावो से जो भरा हुआ हो वही मार दो धर्म है। देसी मकड़ी के जाल में तंतु सबसे कोमल होते हैं। हाथ लगाओ टूट जाता है। लेकिन मार दो धर्म तो उसे तंतु से अधिक मृदु होता है। किसी के बारे में बुरा सोचो तो यह मार्दव धर्म समाप्त हो जाएगा। अहंकार को सबसे बड़ा शैतान बताया। अहंकार के कारण ही बड़े-बड़े विद्वान के दुर्गुण के कारण पतन के गर्त में समा जाते हैं। उन्होंने रावण का उदाहरण दिया। मार्दव धर्म का यह दिन अपने अंदर के मान को, कटुता को छाटने का है। मार्दव धर्म की छेनी से इससे निकाल कर अपने आप को मानव से महामानव बनाए और मार्दव धर्म को अपनाए।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
