28 फीट की खड़खासन प्रतिमा आकर्षण का केंद्र ध्यान के लिए सबसे उपयुक्त स्थल आस्था का बड़ा केंद्र जैन तीर्थ थूबोनजी 

धर्म

28 फीट की खड़खासन प्रतिमा आकर्षण का केंद्र ध्यान के लिए सबसे उपयुक्त स्थल आस्था का बड़ा केंद्र जैन तीर्थ थूबोनजी  अशोक नगर जिला मुख्यालय से करीब 32 किलोमीटर दूर स्थित थूबोन पंचायत की देशभर में पहचान देशनोदय तीर्थ जैन मंदिर से है। विगत 15 साल में थूबोनजी पंचायत क्षेत्र में स्थित श्री देशनोदय तीर्थ थूबोनजी आस्था का सबसे बड़ा केंद्र बन गया है। 

 

 

  मंदिर में भगवान आदिनाथ की 28 फीट की खड़गासन प्रतिमा आकर्षण का केंद्र है। इतना ही नहीं थूबोन क्षेत्र ध्यान के लिए सबसे उपयुक्त स्थल है। यहां पर दो बार आचार्य श्री विद्यासागर जी के चातुर्मास हो चुके हैं। देशनोदय तीर्थ क्षेत्र में आने वाले दर्शनार्थियों को फाइव स्टार होटल जैसी सुविधा है।

 

 

    विवरण 

  मंदिर का निर्माण 12वीं शताब्दी में पाड़ाशाह द्वारा किया गया था। मंदिर में भगवान आदिनाथ की खड़गासन मूर्ति स्थापित है। मंदिर में रोजाना देश भर से जैन समाज के लोग दर्शन करने के लिए आते हैं। विंध्याचल पर्वतमाला की गोद में बसे 26 जिन मंदिरों का वैभव समेटे दिगंबर जैन संस्कृति की अमूल्य विरासत श्री देशनोदय तीर्थ मध्य प्रदेश प्रकाश का प्रमुख जैन तीर्थ है। यहां के जिन मंदिरों में भव्य आकर्षक जिन प्रतिमाएं विराजमान हैं। इन जिन प्रतिमाओ के दर्शन के लिए रोजाना देशभर से जैन समाज के लोग पहुंचते हैं।

इस पवित्र तीर्थ स्थल का निर्माण 12वीं शताब्दी में पाड़ाशाह द्वारा किया गया था। अतिशय श्री देशनोदय तीर्थ क्षेत्र थूबोनजी के जिन मंदिरों में विराजमान भव्य जिन प्रतिमाएं वीतरागता की प्रतिमूर्ति तो है ही वह अतिशयकारी भी है।

इसके साथ ही पाड़ाशाह के नाम पर क्षेत्र के दक्षिण की ओर थूबोन नाम से लगी हुई एक सरॊवरी है, जिसे पाड़ाशाह तलैया कहते हैं। किवदती है कि पाड़ाशाह के पास पारस पथरी थी जिसका स्पर्श कराकर लोहे से सोना बना लेते थे। यह पारस पथरी उन्हें इसी तलैया से प्राप्त हुई थी।

एक बार पाड़ाशाह का पाडा इस तलैया में घुसा तो पारस पथरी के स्पर्श से उसकी लोहे की सांकल सोने में परिवर्तित हो गई। 

 

    जिनालय को भव्य रूप प्रदान किया गया 

   संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर महाराज संघ के इस क्षेत्र में दो चातुर्मास हुए हैं। पहला चातुर्मास सन 1979 दूसरा चातुर्मास सन 1987 में हुआ था आचार्य श्री की प्रेरणा एवं आशीर्वाद से श्री आदिनाथ जिनालय को भव्य रूप प्रदान किया गया। यह क्षेत्र तपोवन के रूप में प्रसिद्ध है। यहां पर अनेक ऋषि मुनियों ने तपस्या की है। आज भी क्षेत्र का संपूर्ण वातावरण तपस्या के लिए अनुकूल है। 

            संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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